टीम इंडिया को दो वर्ल्डकप जिताने वाले कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी के नाम रविवार को एक और मुकाम जुड़ गया। जोखिम और रोमांच से भरी 15 दिन की बेसिक पैराजंपिंग ट्रेनिंग पूरी करने पर उनके सीने पर पैराविंग का निशान सजा दिया गया। एयरफोर्स के पैराट्रैनिंग स्कूल (पीटीएस) में सुबह दस बजे आयोजित पैराविंग सेरेमनी में उन्हें यह तमगा दिया गया। इसके बाद ऑनरेरी लेफ्टिनेंट कर्नल अपनी ऑडी कार से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वहां से फ्लाइट पकड़कर वे मुंबई जाएंगे।
एमएस को आर्मी ने लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि दी। इसके चलते उनके लिए पैराविंग का बेसिक कोर्स करना जरूरी थी। इसे पूरा करने के लिए माही छह अगस्त को आगरा आए थे। पहले ग्राउंड ट्रेनिंग हुई। फिर एयर ट्रेनिंग। इसके बाद तीन दिन में 1,250 फुट की ऊंचाई से हवाई जहाज से पैराशूट के साथ जंप लगाई। आखिरी जंप रात में हुई। इसी के साथ उनका बेसिक कोर्स पूरा हो गया और पैराविंग का निशान पाने के हकदार बन गए। रविवार को पैराविंग सेरेमनी में धोनी और नौ ऑफिसर 141 पैराट्रूपर को पैराविंग लगाए गए। भीड़ से खचाखच भरे परिसर में उनके साथ धोनी कदम से कदम मिलाकर मंच तक पहुंचे। एक-एक कर ऑफिसर को मंच पर बुलाकर एयर कमोडोर श्रीनिवासन ने सीने पर पैराविंग लगाया। अपनी बारी आने पर धोनी मंच पर पहुंचे, पैराविंग लगते ही धोनी ने कमोडोर को सैल्यूट किया। धोनी को बेसिक कोर्स पूरा करने का सर्टिफिकेट भी दिया गया।
कार्यक्रम में डीएम पंकज कुमार, बिग्रेडियर विकास सैनी, आर्मी एयरबॉन ट्रेनिंग स्कूल के कमांडर कर्नल ग्रूम के अलावा आर्मी और एयरफोर्स सैनिकाें की परिवारीजन शामिल रहे।
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मौका मिला तो फिर आऊंगा
- पैराविंग सेरेमनी में धोनी ने मन की बात कही। बोले कि ट्रेनिंग बेहद रोमांचकारी रही। यह दिन उनके लिए यादगार रहेंगे। आर्मी के लिए हरवक्त तैयार हूं। कोशिश रहेगी कि हर साल यहां आऊं। उन्होंने दर्शकदीर्घा में सभी का अभिवादन कर विदा ली।
आगरा से मीठी यादों का खजाना ले गए धोनी
क्रिकेट कॅरियर में पहली बार 15 दिन तक बैट-बॉल से दूर रहे
आगरा। कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी 15 दिन की ट्रेनिंग में भले ही ताज का दीदार न कर पाए हों, लेकिन ताजनगरी से मीठी यादों का अनमोल खजाना अपने साथ ले गए हैं। उनके लंबे क्रिकेट कॅरियर में यह शायद पहला मौका था जब आधा महीना तक बैट-बॉल और कीपिंग ग्लब्ज से बिल्कुल दूर एक सैनिक की तरह रहे। सुबह चार बजे उठना, परेड ग्राउंड जाना, फौजियों के साथ वालीबाल खेलना और जरा सी फुर्सत मिलते ही बच्चों के बीच पहुंच जाना।
यह बिल्कुल अनूठा अनुभव था माही के लिए। पैराजंपिंग ट्रेनिंग सेंटर जाते तो शिष्य बन जाते और स्कूल पहुंचते तो टीचर। उनकी तैयारी मुकम्मल थी, लेकिन पैराट्रूपर ने सुरक्षा में जरा भी चूक नहीं रखी। एक बार पैराशूट के साथ उतरते समय जरा सा क्या लड़खड़ाए, पैराट्रूपर ने आकर तुरंत थाम लिया। जैसे क्रिकेट के मैदान में दर्शक धोनी-धोनी चिल्लाते हैं, वैसे ही नारे पैरा ड्रापिंग जोन के बाहर भी सुनने को मिले। एक बार तो लोग उनकी जिप्सी के आगे ही अड़ गए।
धोनी ने आर्मी ऑफिसर के दिल में भी अपने लिए खास जगह बनाई। उनकी सादगी पर हर कोई फिदा हो गया। पैराविंग कार्यक्रम में एयर कमोडोर श्रीनिवासन ने उनके जज्बे को सराहा। कहा कि ट्रेनिंग में वे कभी सेलेब्रिटी की तरह पेश नहीं आए। उन्हाेंने बच्चों से लेकर युवाओं तक के मन में आर्मी ज्वाइन करने का जज्बा जगाया। माही ने भी हर कार्यक्रम में यही कहा कि वे आगरा से मिले प्यार और सम्मान को कभी भूल नहीं पाएंगे।