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गेहूं के बाद अब धान की कीमतों ने दिया किसानों को झटका

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नवीन मंडी में धान की तौल करते मजदूर - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। गेहूं की कम कीमतों के बाद अब धान की कीमतों ने भी किसानों को झटका दिया है। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार किसानों को 25 प्रतिशत तक कम कीमत मिल रही है। लागत बढ़ने और कीमत कम मिलने से अन्नदाता परेशान हैं।
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जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। इस बार भी लगभग 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों ने धान की बुवाई की थी। अब धान की कटाई शुरू हो गई, लेकिन मंडी में धान की कीमतों ने किसानों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। हाल ये है कि जहां पतले धान की कीमत किसानों को 1500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही है, वहीं हाईब्रिड धान की कीमत 1200 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही है।
बीते वर्ष ये कीमत क्रमश: दो हजार रुपये प्रति क्विंटल और 1600 रुपये प्रति क्विंटल थी। ऐसे में लगभग 25 प्रतिशत कम कीमतों पर किसानों को धान की बिक्री करनी पड़ रही है।दूसरी ओर इस बार बारिश कम होने से किसानों ने निजी संसाधनों से धान की सिंचाई की। इसके चलते बीते वर्ष की अपेक्षा लागत में भी 20 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।
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क्रय केंद्रों पतले धान की नहीं होती खरीद
सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान की खरीद करने के लिए जिले में 15 क्रय केंद्र बनाए हैं। यहां 1868 रुपये प्रति क्विंटल कीमत पर धान की खरीद की जानी है। इन केंद्रों पर केवल कॉमन धान ही लिया जाता है। पतला धान यहां नहीं खरीद जाता है, इससे किसान मंडी में धान बेचने को मजबूर हैं।
नहीं बढ़ी गेहूं और मक्का की कीमतें
किसानों इस बार पूरा साल ही नुकसान में बीता है। गेहूं की कम कीमतें जहां अब तक नहीं बढ़ सकती हैं ता मक्का का हाल भी कुछ ऐसा ही है। दीपावली तक मंडी में हर साल गेहूं की कीमत दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाती थी, लेकिन इस बार किसानों को 1500 रुपये प्रति क्विंटल में ही गेहूं बेचना पड़ रहा है। मक्का की बिक्री एक हजार रुपये से 1100 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर हो रही है।
हाईलाइटर
-65 हजार हेक्टेयर है धान का क्षेत्रफल
-01 लाख किसान करते हैं धान की खेती
-03 लाख मीट्रिक टन के करीब होता है उत्पादन
-1500 रुपये प्रति क्विंटल है पतले धान की कीमत
-1200 रुपये है हाईब्रिड धान की कीमत
लोगों की बात
इस बार फसलों की कीमतों ने किसानों को कर्ज में डुबो दिया है। पहले ही गेहूं और मक्का की फसल में किसान मारा गया तो वहीं अब धान की कीमत भी काफी कम है। बमुश्किल धान की लागत और मजदूरी ही निकल पा रही है।
मोनू कुमार, किसान, नगला मूले।
धान का उत्पादन जिले में बड़े पैमाने पर होता है। व्यापारी मनमानी कीमतों पर धान की खरीद करते हैं। मंडी प्रशासन और जिला प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं देते हैं। इससे किसानों को हर बार कीमत पर ही धान बेचना पड़ता है।
उमेश चंद्र दुबे, किसान, दीनापुर।
हमारा उद्देश्य रहता है कि अधिक से अधिक कीमत पर किसानों की फसल की बिक्री हो। व्यापारी ही इस बार धान कम कीमत पर खरीद रहे हैं। ऐसे में आढ़ती कुछ भी नहीं कर सकते हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
रज्जन सिंह चौहान, आढ़ती।
धान की कीमतों के लए सरकार ही जिम्मेदार है। जब भी चावल का निर्यात किया जाता है तो धान की कीमतें बढ़ जाती हैं। इस बार कई देशों को चावल नहीं भेजा जा रहा है, इससे धान की कीमतों में गिरावट आ गई है।
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विजेंद्र सिंह, आढ़ती।
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