आज देवशयनी एकादशी है। आज के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे, जिससे शादी विवाह के साथ साथ सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। अब चार माह के बाद यानि आठ नवंबर को देव उत्थान एकादशी को भगवान विष्णु नींद से जागेंगे। इसके बाद ही शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे।
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि देवशयनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु निद्रा में चले जाते हैं। पुराणों के अनुसार इन चार महीनों के दौरान विष्णु भगवान पाताल लोक के राजा बलि के पास रहते हैं। इसलिए कहा जाता है कि श्री हरि निद्रा में है। इन चार महीनों को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है।
यह नहीं होते कार्य
भगवान श्री हरि विष्णु के निद्रा में चले जाने की वजह से चार माह तक विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, उपनयन संस्कार आदि नहीं होते हैं। इनकी शुरुआत देवउत्थान एकादशी से होती है, जो इस बार आठ नवंबर की है।
इसलिए सो जाते हैं भगवान विष्णु
वामन पुराण के मुताबिक असुरों के राजा बलि ने अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि के आधिपत्य को देखकर इंद्र और देवता घबराकर भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे।
देवताओं की पुकार पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। वामन भगवान ने बलि से तीन पग भूमि मांगी। पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश को नाप लिया। अब तीसरा पग रखने को कुछ बचा नहीं था तो राजा बलि ने कहा कि तीसरा पग मेरे सिर पर रख दें। ऐसा करने पर देवताओं की चिंता खत्म हो गई।
राजा बलि ने भगवान से पाताल में बसने का वर मांग लिया। बलि की इच्छापूर्ति को भगवान को पाताल जाना पड़ा। अपने पति भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी गरीब स्त्री बनकर राजा बलि के पास पहुंची और उन्हें अपना भाई बनाकर राखी बांध दी।
बदले में भगवान विष्णु को पाताल लोक से वापस ले जाने का वचन ले लिया। पाताल से लौटते समय भगवान विष्णु ने बलि को वरदान दिया कि वह आषाण शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक पाताल लोक में वास करेंगे। पाताल लोक में उनके रहने की अवधि को योगनिद्रा माना जाता है।