गंगा के अवतरण दिवस गंगा दशहरा तीर्थनगरी का बड़ा मेला है। प्रतिवर्ष दशहरा के स्नान पर्व पर काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते आए हैं। सोरों तीर्थनगरी की हरिपदी, लहरा और कछला गंगाघाट पर गंगास्नान श्रद्धालुओं के द्वारा किया जाता है, लेकिन कोरोना के कारण इस बार प्रशासन ने गंगा दशहरा के सामूहिक स्नान पर रोक लगाई है।
गंगास्नान पर रोक के कारण श्रद्धालु गंगाघाटों पर नहीं पहुंच सकेंगे। जिसे गंगाजली, प्रसाद, खिलौना आदि के कारोबारियों को दिक्कतें होंगी। क्योंकि दूसरी लहर में जब से कोरोना कर्फ्यू लगा है तब से कारोबार पर असर है। अब अनलॉक के बाद भी बड़े आयोजन आदि पर रोक है। जिसका असर दिखाई दे रहा है।
ये कहते हैं कारोबारी-
- गंगा दशहरा का बड़ा स्नान पर्व है। इस स्नान पर्व पर काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते आए हैं, लेकिन जब श्रद्धालु नहीं पहुंचेंगे तो कारोबार नहीं हो सकेगा। कंठीमाला, खिलौने आदि की बिक्री काफी समय से प्रभावित है- अनुभव चौधरी, कंठीमाला विक्रेता
- गंगा दशहरा गंगा अवतरण दिवस है। गंगास्नान करके सपरिवार लोग पूजा अर्चना करते हैं। गंगास्नान पर रोक न्यायोचित नहीं है। पहले मंद कारोबार पर इससे और अधिक बुरा प्रभाव पड़ेगा। - गोपाल कसेरे, गंगाजली विक्रेता
- गंगादशहरा पर स्नान पर प्रतिबंध ठीक नहीं है। थोक दुकानदारों और फुटकर दुकानदारों को मेले से आस रहती है। लहरा और कछला पर काफी दुकानदार माल लेकर आए हैं। जब श्रद्धालु नहीं पहुंचेंगे तो बिक्री कैसे होगी- राजू मिश्रा, कारोबारी
- गंगा दशहरा पर तमाम लोग देवी देवताओं की पोशाक व श्रंगार का का सामान लेते हैं। देवी देवताओं को नई पोशाकें पहनाकर श्रंगार किया जाता है। प्रसाद की बिक्री भी होती है, लेकिन अब प्रसाद की बिक्री भी नहीं होगी। - दिनेश पाराशर, पोशाक विक्रेता
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