महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करने के लिए कांवड़ मेला परवान चढ़ने लगा है। तीर्थनगरी सोरों और लहरा गंगाघाट पर हजारों की संख्या में शिवभक्त कांवड़िए राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे हैं। कांवड़ियों की बढ़ती संख्या से सोरों के कांवड़ मेले के दुकानदारों के चेहरे पर उत्साह नजर आने लगा है। तीर्थनगरी का माहौल शिवमय होता जा रहा है।
कांवड़ मेला कई दिन पहले से शुरू हो चुका है लेकिन रविवार रात से कांवड़ियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। रविवार रात से ही भरतपुर, धौलपुर, भिंड, मुरैना, ग्वालियर, करौली आदि स्थानों से बड़ी संख्या में कांवड़ियां श्रद्धालु आए। कांवड़ियों ने हरिपदी गंगा में डुबकी लगाने के बाद कांवड़ व कांवड़ सजाने के सामान की खरीददारी की। इस बार कांवड़ मेला में गतवर्ष की अपेक्षा अधिक दुकानें लगीं हैं। मेला चंदनचौक, लहराघाट, हरि की पैड़ी व कासगंज रोड पर अस्पताल तक लगता था अब यह बढ़कर कासगंज रोड पर गणेश मंदिर तक पहुंच गया है। लहरा घाट पर निरंतर कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। कांवड़िए घाट किनारे बैठकर लोकगीत गुनगुनाते हुए कांवड़ सजाने में तल्लीन है। कांवड़ सजाने के बाद गंगास्नान करके कांवड़िए गंगाजल कांच की गंगाजलियों में भरकर कांवड़ में रखते हैं कांवड़ की परिक्रमा व पूजन के बाद कांवड़ को कंधों पर उठाकर भोला तेरी बम के जयकारे लगाते हुए टोलियों के रूप में अपने गंतव्य को निकल पड़ते हैं। फिर रात हो चाहे दिन अविराम चलते हुए कांवड़िए अपने गंतव्य पर शिवरात्रि को पहुंचकर ही भोले का गंगाजल से अभिषेक करेंगे।
कांवड़ियों की बात-
- तीर्थनगरी से गंगा जी का पवित्र जल ले जाकर महादेव का जलाभिषेक करने की परंपरा उनके परिवार में लंबे समय से चली आ रही है। महाशिवरात्रि में भगवान महादेव के गंगाजल से अभिषेक करने से वर्षभर एक अदृश्य ऊर्जा कर्म पथ पर डटे रहने की प्रेरणा देती रहती है। - रवि परमार, धौलपुर।
- 18 वर्ष से निरंतर महाशिवरात्रि में सोरोंजी घाट से कांवड़ भर कर ले जाते हैं। जब तक महादेव बाबा शरीर में शक्ति देंगे तब तक यह सिलसिला भविष्य में निरंतर जारी रखेंगे। बाबा की कृपा से परिवार में अमन चैन बना रहता है। - रामित, ग्वालियर।
ज्योतिषाचार्य की बात
सोरों। पं. राहुल वशिष्ठ के अनुसार महाशिवरात्रि वाले दिन चारों प्रहरों में अलग-अलग रूद्राभिषेक का विशेष महत्व है। पूजन में विल्व पत्र व धतूरा अनिवार्य है। ऐसा करने से भगवान भोले प्रसन्न होकर साधक को मनवांछित फल प्रदान करते हैं। शिवभक्त कांवड़िए तीर्थनगरी के शिवालयों में मत्था टेककर अपने गंतव्य पथ पर आगे बढ़ते चले जाते हैं। प्राचीन काल में तीर्थनगरी में भागीरथी गंगा तीव्र धारा के साथ बहती थी। उस समय नेपाल नरेश द्वारा तीर्थनगरी के चार कोनों पर चार शिवालयों की विधि-विधान पूर्वक स्थापना कराई थी। स्वयं नेपाल नरेश ने पत्नी के साथ इन चारों शिवालयों में पूजा अर्चना की थी। ये चार शिवालय योगेश्वर, सोमेश्वर, भूतेश्वर, दूधेश्वर महादेव हैं।
कासगंज फोटो महिला कांवड़िया रामवती- फोटो : KASGANJ
कासगंज सोरों रोड पर गुजरतीं महिला कांवड़ियां- फोटो : KASGANJ
कासगंज सोरों पर गुजरती महिला कांवड़िया- फोटो : KASGANJ
कासगंज फोटो महिला कांवड़िया कमलेश- फोटो : KASGANJ
कासगंज फोटो महिला कांवड़िया सावित्री- फोटो : KASGANJ
कासगंज फोटो महिला कांवड़िया हिमानी- फोटो : KASGANJ