सोरों। वरूथिनी एकादशी पर्व पर धर्मप्रेमियों ने हरिपदी गंगा में स्नान कर व्रत रखा। वहीं गंगा घाटों पर बने मंदिरों में पूजा अर्चना की और अपने परिवार की खुशहाली के लिए कामना की। हरि की पैड़ी की श्रद्धालुओं ने परिक्रमा भी की।
इस पुण्य व्रत को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पं. राहुल वशिष्ठ ने बताया कि इस व्रत में भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा करनी चाहिए। इस व्रत के करने से अन्नदान तथा कन्यादान दोनों दानों का श्रेष्ठ फल मिलता है। इस व्रत से कई वर्षों की तपस्या का फल मिल जाता है।
इस व्रत के माहात्मय को पढ़ने से एक सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। संयम धारण कर यह व्रत करने से मनुष्य के सुख व सौभाग्य में वृद्धि होती है। श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त से ही हरिपदीय में गंगा स्नान किया। हरि की पैड़ी की परिक्रमाण की। श्रद्धालुओं ने तीर्थनगरी के वराह मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, मानस मंदिर, रघुनाथजी मंदिर में पूजा अर्चना की और खुशहाली की मनौतियां मांगी। वहीं श्रद्धालुओं के द्वारा रात्रि में भजन कीर्तन भी किए गए।