इस साल भी 316.67 करोड़ रुपये की 17 योजनाएं कागजों से बाहर नहीं आईं। 2021-22 में भी हालात नहीं बदले। फिर 39 विभागों के लिए 510.09 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत हुई। जिनके सापेक्ष 222.86 करोड़ का बजट मिला। 287.23 करोड़ रुपये की 13 योजनाएं कागजों में धूल फांकती रहीं। इस तरह आगरा में तीन साल में 828.32 करोड़ रुपये की 72 विभागों की योजनाएं कागजों से बाहर नहीं आईं हैं।
इन योजनाओं के लिए नहीं मिला बजट
- सड़क व पुल निर्माण : 2020-21 में 87.43 करोड़ के कार्य प्रस्तावित थे, एक रुपया नहीं मिला। फिर 2021-22 में 46.97 करोड़ कार्यों के लिए 1.68 करोड़ रुपया मिला।
- नगर विकास व पेयजल : 2020-21 में 6.04 करोड़ रुपये के कार्यों के लिए कोई पैसा नहीं मिला। फिर 2021-22 में 6.04 रुपये कार्यों के लिए कोई बजट जारी नहीं हुआ।
- ग्रामीण स्वच्छता : 2020-21 में 66.36 करोड़ के कार्यों के लिए 11.57 करोड़ रुपये मिले। 2021-22 में 66.88 करोड़ के कार्यों के लिए 8.10 करोड़ रुपये मिले।
- शिल्पकार प्रशिक्षण : 2020-21 में 7.50 करोड़ रुपये के सापेक्ष उपलब्धि शून्य रही। 2021-22 में 1.50 करोड़ के बदले बजट नहीं मिला।
- आयुर्वेद व होम्योपैथी : 2020-21 और 21-22 में 1.15 करोड़ रुपये मिलने थे, दोनों सालों में एक रुपया दोनों विभागों के लिए नहीं मिला।
- पर्यटन विकास : 2020-21 में 1.70 करोड़ और 2021-22 में 1.45 करोड़ रुपये की योजना बनीं, दोनों वर्ष में एक रुपया तक नहीं मिला।
- प्रावधिक शिक्षा : 2020-21 और 21-22 में 3.50 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन दो वर्ष में बजट के नाम पर विभाग खाली हाथ रहा।
- खेलकूद : 2020-21 और 21-22 में जिला योजना के तहत न कोई का प्रावधान किया गया, न कोई बजट मिला।
नहीं मिलता बजट
जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी ओमकार सिंह ने बताया कि जिला योजना में बजट नहीं मिलता। बमुश्किल 20% से 30% बजट मिलता है। जिसके कारण कई विभागों की योजनाओं में कोई काम नहीं हो सका है।