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जिला योजना की हकीकत: आगरा में कागजों से बाहर नहीं आईं 828.32 करोड़ रुपये की 72 योजनाएं

Mon, 29 Aug 2022 05:44 PM IST
मुकेश कुमार देश दीपक तिवारी, अमर उजाला आगरा

सार

तीन वर्षों में 120 योजनाओं के लिए 1482.77 करोड़ रुपये के प्रस्ताव बने। लेकिन विकास के लिए महज 48 योजनाओं पर सरकार ने 654.45 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में जिला योजना और विकास का धरातल पर हश्र देखिए। तीन साल 2019 से 2021 तक 72 योजनाओं के लिए एक पाई नहीं मिली। 828.32 करोड़ रुपये की यह योजनाएं तीन साल में फाइलों से बाहर नहीं आईं। तीन वर्षों में 120 योजनाओं के लिए 1482.77 करोड़ रुपये के प्रस्ताव बने। लेकिन विकास के लिए महज 48 योजनाओं पर सरकार ने 654.45 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

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अब 2022-23 के लिए फिर नई योजना बन रही है। वित्त वर्ष शुरू होने के पांच महीने बाद भी योजना की बैठक तो दूर जिले के प्रभारी मंत्री तय नहीं हो सके हैं। 2020 व 2021 में पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में योजना का अनुमोदन हुआ था। इसके बावजूद पूर्व डिप्टी सीएम जिस जिले के प्रभारी रहे उसके लिए बजट जारी नहीं करा सके। इनमें सड़क, पेयजल, सिंचाई, पर्यटन, खेलकूद, परिवार कल्याण, आयुर्वेद, ग्रामीण आवास एवं पुष्टाहार के लिए बजट नहीं मिलने से योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं हैं।

14 विभागों के हाथ खाली 

वित्त वर्ष 2019-20 में जिला योजना से 42 विभागों के लिए 462.59 करोड़ रुपये के कार्य होने थे। शासन से सिर्फ 238.17 करोड़ रुपये मिले। तब 14 विभाग खाली हाथ रहे। इनकी 224.42 करोड़ रुपये की योजनाओं के लिए धेला नहीं मिला। फिर 2020-21 में 39 विभागों के लिए 510.09 करोड़ रुपये कार्य स्वीकृत हुए। महज 193.42 करोड़ रुपये मिले।

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इस साल भी 316.67 करोड़ रुपये की 17 योजनाएं कागजों से बाहर नहीं आईं। 2021-22 में भी हालात नहीं बदले। फिर 39 विभागों के लिए 510.09 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत हुई। जिनके सापेक्ष 222.86 करोड़ का बजट मिला। 287.23 करोड़ रुपये की 13 योजनाएं कागजों में धूल फांकती रहीं। इस तरह आगरा में तीन साल में 828.32 करोड़ रुपये की 72 विभागों की योजनाएं कागजों से बाहर नहीं आईं हैं।

इन योजनाओं के लिए नहीं मिला बजट

- सड़क व पुल निर्माण : 2020-21 में 87.43 करोड़ के कार्य प्रस्तावित थे, एक रुपया नहीं मिला। फिर 2021-22 में 46.97 करोड़ कार्यों के लिए 1.68 करोड़ रुपया मिला।
- नगर विकास व पेयजल : 2020-21 में 6.04 करोड़ रुपये के कार्यों के लिए कोई पैसा नहीं मिला। फिर 2021-22 में 6.04 रुपये कार्यों के लिए कोई बजट जारी नहीं हुआ।
- ग्रामीण स्वच्छता : 2020-21 में 66.36 करोड़ के कार्यों के लिए 11.57 करोड़ रुपये मिले। 2021-22 में 66.88 करोड़ के कार्यों के लिए 8.10 करोड़ रुपये मिले।
- शिल्पकार प्रशिक्षण : 2020-21 में 7.50 करोड़ रुपये के सापेक्ष उपलब्धि शून्य रही। 2021-22 में 1.50 करोड़ के बदले बजट नहीं मिला।
- आयुर्वेद व होम्योपैथी : 2020-21 और 21-22 में 1.15 करोड़ रुपये मिलने थे, दोनों सालों में एक रुपया दोनों विभागों के लिए नहीं मिला।
- पर्यटन विकास : 2020-21 में 1.70 करोड़ और 2021-22 में 1.45 करोड़ रुपये की योजना बनीं, दोनों वर्ष में एक रुपया तक नहीं मिला।
- प्रावधिक शिक्षा : 2020-21 और 21-22 में 3.50 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन दो वर्ष में बजट के नाम पर विभाग खाली हाथ रहा।
- खेलकूद : 2020-21 और 21-22 में जिला योजना के तहत न कोई का प्रावधान किया गया, न कोई बजट मिला।

नहीं मिलता बजट

जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी ओमकार सिंह ने बताया कि जिला योजना में बजट नहीं मिलता। बमुश्किल 20% से 30% बजट मिलता है। जिसके कारण कई विभागों की योजनाओं में कोई काम नहीं हो सका है।
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