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Agra News: गले की तितली ग्रंथि का बिगड़ना, थकान व वजन नियंत्रण में परेशानी

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आगरा। गले में थायरॉइड ( तितली के आकार ) की ग्रंथि के बिगड़ने से थकान के साथ वजन अनियंत्रित हो रहा है। ऑपरेशन, कैंसर की दवाएं लेने और प्रसव के बाद ऐसा हो सकता है। इसके लक्षणों को नजरअंदाज किए बिना नियमित उपचार जरूरी है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ये बीमारी तीन गुना अधिक है।
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मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 70-80 मरीजों में ये परेशानी मिल रही है। इसमें महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले तीन गुना अधिक है। गले में तितली के आकार की छोटी ग्रंथि है। ये ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, वजन, हृदय गति, शरीर के तापमान, मानसिक स्थिति, त्वचा, बाल, मासिक धर्म, प्रजनन क्षमता समेत अन्य अंगों के कार्यों को नियंत्रित करती है। थायरॉइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन टी-3, टी-4 शरीर की कोशिकाओं पर प्रभाव डालते हैं। थायरॉइड हार्मोन कम बनने पर हाइपोथायरॉइडिज्म बोलते हैं। इसमें वजन बढ़ने लगता है। थकान, ठंड, सर्दी अधिक लगना, रूसी और बाल झड़ने की परेशानी होती है। अधिक हार्मोंस बनने पर वजन कम होना, घबराहट, तेज धड़कन, पसीना अधिक और नींद कम आती है।
ऑटोइम्यून बीमारी, प्रसव-ऑपरेशन के बाद भी खतरा
एंडोक्राइनोलाॅजी विभाग के डॉ. धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि ये ऑटोइम्यून बीमारी है। ओपीडी में 60-80 मरीज रोज आ रहे हैं, इसमें से 25 फीसदी को थायरॉइड है। इसकी दवा नियमित चलती है।
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इनका रखें ध्यान:
संतुलित मात्रा में आयोडीन नमक का उपयोग करें।
हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दूध, दही, बादाम खाएं।
तंबाकू-धूम्रपान और शराब से दूर रहे।
रोजाना 45 मिनट तेज गति से चलें, नियमित योग करें।
7-8 घंटे की नियमित स्वस्थ नींद लें। तनाव से बचें।
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