आगरा। सुरक्षा ग्रामीण सहकारी आवास समिति के लेन-देन पर प्रतिबंधित होने के बाद भी तत्कालीन अध्यक्ष ने सचिव को प्लाॅट बेच दिया। इस पर अपर जिला सहकारी अधिकारी ने आरोपी पर थाना सदर में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
सुरक्षा ग्रामीण सहकारी आवास समिति की नैनाना जाट में भूमि है। समिति ने बहुत आवासीय भूखंडों की बिक्री की है। इसके बाद समिति का दो बार निबंधन भी रद्द हो चुका है। अपर जिला सहकारी अधिकारी कमलेश ने बताया कि रोहता बाग निवासी श्याम सिंह ने 18 जून और 3 जुलाई 2024 को सुरक्षा ग्रामीण सहकारी आवास समिति से संबंधित शिकायत की थी। बताया कि इस आवासीय समिति का निबंधन 1990 में हुआ था। इसके सचिव हरि सिंह थे। 1990 में समिति ने जमीन खरीदी। इसके बाद तत्कालीन सचिव हरि सिंह ने समिति सदस्य व अन्य को प्लाॅट बिक्री शुरू कर दी। वह 2013 तक सचिव रहे। इसके बाद समिति का कोई चुनाव नहीं हुआ। लेकिन केपी यादव और प्रदीप यादव फर्जी तरीके से समिति के सचिव और अध्यक्ष बन गए। उन्होंने निबंधन निरस्त हुई समिति के फर्जी दस्तावेज बनाकर प्लाट बिक्री की। और प्रदीप यादव से केपी यादव ने प्लाट की रजिस्ट्री करा ली। इस पर जांच की गई तो पाया कि समिति का निबंधन निरस्त होने और उप आयुक्त एवं उप निबंधक सहकारिता मंडल कार्यालय से 2014 में समिति के लेने देन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद भी तत्कालीन अध्यक्ष प्रदीप यादव ने केपी यादव को प्लाट बेच दिया। उसके नियम विरुद्ध कार्य से समिति को नुकसान हुआ।