आगरा। जिले में पुलिस की बर्बरता का यह नया मामला नहीं है। इससे पहले भी पुलिस पर वसूली, मारपीट व थाने-चौकी में लोगों को प्रताड़ित करने के आरोप लगते रहे हैं। सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं और पदाधिकारियों से लेकर एमएलए-एमएलसी तक इस विषय को बैठकों में उठा चुके हैं। शिकायतों और आरोपों के बावजूद न तो सुनवाई हो रही, न ही सख्त कार्रवाई। यही वजह है कि पुलिस की कार्यशैली सुधरने का नाम नहीं ले रही।
किरावली में हुए ताजा बर्बरता के मामले से पहले हाल ही में 7 फरवरी को खेरिया मोड़ निवासी रईस खान को शाहगंज थाने के दरोगा दीपक व सिपाही शनि घर से जबरन उठा ले गए थे। आरोप है कि थाने में दिनभर हिरासत में रखने के बाद 25 हजार रुपये लेकर छोड़ा गया। मामले में सिपाही को लाइन हाजिर किया गया लेकिन दरोगा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दिसंबर 2025 में किरावली में ही पुलिस ने हत्या के एक मामले में पूछताछ के लिए एक भाजपा नेता के चचेरे भाई को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। बाद में उसके बेटे राजू को उल्टा लटकाकर इतना पीटा कि उसके दोनों पैरों की हड्डियां टूट गईं। मार न सह पाने पर बेहोश हुए राजू को पुलिस अस्पताल में छाेड़ गई। अगली सुबह परिजन को मामले का पता चला। एसओ नीरज सिंह, एसआई धर्मवीर और सिपाही रवि को निलंबित किया गया लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
इसी तरह इसी साल जनवरी महीने में जीवनी मंडी चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार पर एक युवक को पीटने और लूट का आरोप लगा। पिटाई की वजह से युवक का पैर टूटने की बात कही गई। इस मामले में भी पुलिस ने निलंबन के बाद न लूट की धाराओं के आधार पर प्राथमिकी लिखी, न ही कोई ठोस कार्रवाई की। अब नया मामला फिर पुलिस की उसी निलंबन और बहाली की कहानी के बीच लटक गया है।
पिछले दो महीनों में तीन बार ऐसा हुआ जब भाजपा नेताओं व विधायकों ने पुलिस को आड़े हाथों लिया। प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह के सामने दो बार नेताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। शांतिभंग की धारा में बंद करने के नाम पर अवैध वसूली करने, पिटाई के आरोप लगाए। आला अधिकारियों पर मातहतों को संरक्षण देने की बात कही।
एमएलसी विजय शिवहरे ने तो नए दरोगाओं को चौकी इंचार्ज तक न बनाने की मांग की थी। वहीं, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया तक ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
डिप्टी सीएम के आदेश पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
जीवनी मंडी चौकी पर युवक से बर्बरता की घटना के बाद जब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आगरा पहुंचे तो नेताओं ने फिर उनके सामने पुलिस की शिकायत की थी। डिप्टी सीएम ने प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी के बाद थाना छत्ता में आरोपी दरोगा व अन्य पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज हुई। हालांकि मामले में इतनी हल्की धाराएं लगाई गईं कि गिरफ्तारी की गुंजाइश ही नहीं रही।
जांच कर होती है सख्त कार्रवाई
पुलिस पर लगने वाले आरोपों की गंभीरता से जांच कर सख्त कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। - आदित्य कुमार, डीसीपी पश्चिम