माईथान, किनारी बाजार, केनरा बैंक और मंटोला जैसे बड़े हादसों के बावजूद आगरा में अवैध निर्माण और जर्जर भवनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। आरोप है कि नोटिस और एफआईआर के बाद भी जिम्मेदार विभागों की लापरवाही जारी है, जिससे लोगों की जान पर लगातार खतरा बना हुआ है।
आगरा के माईथान, किनारी बाजार और बैंक हादसे के बाद भी नगर निगम और आगरा विकास प्राधिकरण के अफसर नहीं जाग रहे हैं। कुछ दिन तक खानापूर्ति की जाती है। नोटिस का खेल खेला जाता है। इसके बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। प्राथमिकी भी लिखी गईं लेकिन सख्त कार्रवाई न होने से लापरवाही जारी है।
शहर में जर्जर मकान और अवैध निर्माण कई बार हादसे करा चुके हैं। 26 जनवरी, 2023 को माईथान स्थित एक धर्मशाला में चल रहे निर्माण से हादसा हुआ था। बेसमेंट की खुदाई से मोहल्ले के आधा दर्जन से अधिक मकान ढह गए थे। कई लोग घायल हुए थे। एक बच्ची की जान चली गई थी। इस घटना के बाद बिल्डर पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। घटना में बिल्डर की लापरवाही सामने आई थी। इसके बावजूद अवैध निर्माण पर रोक नहीं लग सकी।
हाल ही में किनारी बाजार में हादसा हुआ था। 9 अप्रैल की रात को एक शोरूम ढह गया था। हादसा आगे बने पुराने शोरूम को दूसरे से पिछले नव निर्माण से जोड़ने की वजह से हुआ था। हालांकि कोई घायल नहीं हुआ था। इस मामले में भी प्राथमिकी दर्ज हुई थी। 23 अप्रैल को बेलनगंज के भैरों बाजार स्थित केनरा बैंक ढह गया था।
बैंक के बराबर में माॅल का निर्माण किया जा रहा था। खुदाई की वजह से बैंक का भवन कमजोर हो गया। अचानक बैंक का आधा हिस्सा गिर गया था। गनीमत रही कि कर्मचारी और ग्राहक बच गए। इस घटना के बाद जर्जर भवनों को चिह्नित किया गया। नोटिस भी भेजे गए। कार्रवाई की बात कही गई मगर कुछ नहीं हुआ। नगर निगम की नाले पर बनी दुकान ही ढह गईं। इसमें आधा दर्जन से अधिक घायल हो गए। मंटोला बाजार कमेटी के अध्यक्ष अदनान कुरैशी का कहना था कि नगर निगम को दुकान के बारे में जानकारी दी गई थी मगर मरम्मत नहीं कराई गई। इस वजह से हादसा हो गया। इस मामले में नगर निगम कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।