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घातक है डेंगू का स्ट्रेन: डेन-2 से जीवनरक्षक अंग हो रहे प्रभावित, आंखों में दर्द, हृदय की मांसपेशियां पड़ीं कमजोर

Thu, 14 Oct 2021 12:37 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बुखार आने पर खुद की डॉक्टरी या फिर झोलाछाप से इलाज न कराएं। चिकित्सकों से परामर्श लेकर इलाज कराएं। टीम झोलाछाप की दुकान सील भी कर रही है। सरकारी अस्पतालों में वायरल बुखार और डेंगू का इलाज-जांच पूरी तरह से निशुल्क है। 
 
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डेंगू-मलेरिया वार्ड (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डेंगू का डेन-2 स्ट्रेन लोगों को हड्डी तोड़ बुखार दे रहा है। इससे जीवनरक्षक अंग लिवर, फेफड़े, हृदय और आंखें तक प्रभावित हो रहे हैं। आगरा और फिरोजाबाद के गंभीर हाल के मरीजों में हालत ज्यादा खराब मिल रही है। 

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एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि डेंगू वार्ड में अब तक करीब 220 से अधिक मरीजों का उपचार हुआ है। इसमें से दो की ही मौत हुई है। फिरोजाबाद और आगरा के गंभीर हाल के मरीजों में शरीर पर लाल चकत्ते, रक्तस्राव, लिवर पर सूजन मिली। ऐसे भी मरीज मिले जिनकी आंखें लाल थी, उसमें दर्द हो रहा था। निमोनिया होने पर सांस लेने में भी परेशानी हुई। हृदय की मांसपेशियां भी कमजोर होने से धड़कन अनियंत्रित पाई गई। इलाज के तीन-पांच दिन में तेजी से सुधार हुआ। करीब 200 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं।

बुखार आने पर देर न करें : सीएमओ
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बुखार आने पर खुद की डॉक्टरी या फिर झोलाछाप से इलाज न कराएं। चिकित्सकों से परामर्श लेकर इलाज कराएं। टीम झोलाछाप की दुकान सील भी कर रही है। सरकारी अस्पतालों में वायरल बुखार और डेंगू का इलाज-जांच पूरी तरह से निशुल्क है। 

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डेंगू के डेन-2 का असर
दिमाग : सूजन से दौरे, सिर में दर्द, तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित।
आंखें : लाल होना, पानी आना, कॉर्निया में दर्द रहना।
फेफडे़ : निमोनिया, पानी भरने से सांस लेने में परेशानी।
हृदय : मांसपेशियां कमजोर होना, धड़कन अनियंत्रित होना।
किडनी : रक्तचाप कम होने से किडनी फेल का खतरा।
लिवर : सूजन से भूख कम लगना, पेट में असहनीय दर्द होना।
पेट : पानी भरने से पेट फूलना, गैस बनना, दर्द होना।
मांसपेशियां : शरीर पर लाल चकत्ते होना, मांसपेशियों में दर्द होना।
हड्डी : रीढ़ की हड्डी समेत हाथ-पैरों की हड्डियों में दर्द होना।
( जैसा कि डॉ. नीरज यादव बाल रोग विशेषज्ञ, एसएन मेडिकल कॉलेज ने बताया)

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