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विमुद्रीकरण के 52 दिन: बैंक में खत्म हुई कतार, मुश्किल में किसान-कारोबार

Fri, 30 Dec 2016 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
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नहीं मिला कैश - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के एलान के 52 दिन पूरे हो रहे हैं। इस दौरान कैश की किल्लत से आम आदमी जूझता रहा, लेकिन पहुंच वालों को कैश की कोई कमी नहीं हुई। नोटबंदी की मियाद बीतने से पहले बैंकों में कतार छोटी और कुछ जगह खत्म भी हुई है, लेकिन कैश की उपलब्धता नहीं बढ़ रही। नोटबंदी में ताजनगरी में 6440 करोड़ रुपये जमा कराए गए, लेकिन इसके एक चौथाई यानी ठीक 1610 करोड़ रुपये ही ग्राहकों के पास लौटे। बंद नोटों को बैंक में जमा करने की तेजी एक महीने तक तो रही, लेकिन उसके बाद निकासी का दबाव बढ़ गया। हाल ये है कि देहात की बैंक शाखाओं में कैश अब तक नहीं है, जिसका असर रबी की बुवाई और कारोबार पर बुरी तरह से पड़ा है।
जिले में 486 बैंक शाखाएं हैं, जिनमें से 52 ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त की शाखाएं हैं। 52 दिनों की नोटबंदी में करीब 40 दिन देहात की बैंकों में कैश ही नहीं पहुंचा। सरकारी बैंकों की ग्रामीण इलाकों में मौजूद शाखाओं को भी हर दिन 1.10 लाख रुपये औसतन ही कैश मिल पाया, वह भी महज 25 लोगों के लिए नाकाफी साबित हुआ। बैंकों को हर ग्राहक को हर सप्ताह 24 हजार रुपये देने की लिमिट रिजर्व बैंक ने दी थी, लेकिन कैश की कमी के कारण बैंक मैनेजरों ने यह लिमिट 2 तो कहीं 4 हजार कर दी। सुबह 7 बजे से कड़ाके की ठंड में लोग 2 हजार रुपये के लिए 6-7 घंटे तक कतार में लगे। इन 52 दिनों में 600 से ज्यादा एटीएम के तो शटर ही नहीं खुले। प्राइवेट बैंकों के एटीएम में कैश मिला, लेकिन 2 हजार रुपये की लिमिट के कारण एटीएम पर लंबी कतारें रात दो बजे तक नजर आती रहीं। हालांकि 25 दिसंबर के बाद बैंकों में कतार कम हुई और कुछ शाखाओं में तो एकदम खत्म ही हो गई। बंद हो चुके नोटों को 25 दिसंबर के बाद कुछ शाखाओं में ही जमा कराया गया, अन्यथा नई करेंसी ही अब ज्यादातर लोग जमा करा रहे हैं।
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पुराने नोट बैंक में जमा हो चुके, लेकिन बैंक से लिमिट के कारण निकासी हो नहीं पा रही। कारीगर बैंक लाइन में पूरे दिन लगें या काम करें। उन्हें अपनी मजदूरी कैश ही चाहिए। ई-पेमेंट से बंद प्रतिष्ठानों में काम शुरू तो हुआ है, लेकिन पटरी पर आने में समय लगेगा’
गागन दास रामानी, महासचिव, आगरा व्यापार मंडल

नोटबंदी के तुरंत बाद उत्पादन को झटका लगा था, लेकिन अब हालात सुधर रहे हैं। रॉ मैटेरियल आना शुरू हुआ है, लेकिन कारीगरों को पेमेंट में दिक्कतें सबसे ज्यादा हैं। नए बड़े आर्डर न लेकर पुराने आर्डर ही जैसे-तैसे पूरे करने में जुटे हैं ताकि साख खराब न हो।
दिलीप मित्तल, आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चरर्स एक्सपोर्ट चेंबर

पांच गुना तक बढ़ गए ई-पेमेंट
आगरा। नोटबंदी के तुरंत बाद पहले पखवाड़े तक तो नगदी के संकट से कारोबारी जूझे, लेकिन बाद में ई-पेमेंट का सहारा लिया गया। अब हालात ये है कि ई-पेमेंट के जरिए खरीदारी करने वालों की संख्या पांच गुना तक बढ़ी है। पेट्रोल पंप, रेडीमेड गारमेंट, प्रोवीजन स्टोर, ऑटो मोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स, मोबाइल, ज्वैलरी और ताजमहल पर प्रवेश टिकट क्रेडिट-डेबिट कार्ड से खरीदने वालों की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी है। स्वाइप मशीन की डिमांड इतनी है कि 6 महीने की वेटिंग तक चल रही है। बैंकों में स्वाइप मशीनों के हर दिन दर्जनों आवेदन आ रहे हैं। इसके अलावा नेशनल इलेक्ट्रानिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) और रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम (आरटीजीएस) के जरिए लेन-देन बढ़ा है। इसका प्रयोग पांच से छह गुना तक दिसंबर में बढ़ा है।
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स्वाइप मशीनों के लिए हजारों आवेदन आए हैं, जबकि मशीनों की आपूर्ति हो नहीं रही। आर्डर दे दिए गए हैं। कुछ महीनों में स्वाइप मशीनें सभी आवेदकों को उपलब्ध करा दी जाएंगी। ई-पेमेंट और चेक के जरिए लेन-देन बढ़ रहा है।
पंकज सक्सेना, लीड बैंक मैनेजर

6440 करोड़ रुपये के पुराने नोट हुए जमा
1610 करोड़ रुपये की नगदी बैंकों ने दी
380 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले गए
22.5 लाख बैंक खाते हैं ताजनगरी में
6.48 लाख जन-धन एकाउंट
45 एटीएम ही काम कर रहे जिले में
642 एटीएम हैं जिले भर में
486 बैंक शाखाओं में रही दिक्कतें

 
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