आगरा। राष्ट्रसंत आचार्य 108 विद्यासागर महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान करने की मांग राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने उठाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भावपूर्ण एवं विस्तृत पत्र भेजा है।
सांसद जैन ने पत्र में आचार्य विद्यासागर महाराज के व्यक्तित्व, कृतित्व और समाज सेवा को विस्तार से रेखांकित किया है। लिखा कि आचार्यश्री ने 22 वर्ष की अल्पायु में दिगंबर दीक्षा ग्रहण कर स्वयं को पूरी तरह राष्ट्र, धर्म और मानव कल्याण के कार्यों में समर्पित कर दिया। कठोर तप, त्याग, संयम, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य जैसे सिद्धांतों का पालन करते हुए उन्होंने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। वह न केवल जैन समाज, बल्कि संपूर्ण भारतीय समाज के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत रहे हैं। आजीवन उन्होंने कठिन तप, वर्षों की पैदल यात्राएं, अद्वितीय अनुशासन और भौतिक संसाधनों से दूरी बनाकर साधना की। इन सभी कारणों से वे समस्त समाज द्वारा वंदनीय माने गए। संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, मराठी व कन्नड़ सहित विविध भाषाओं में 50 से अधिक ग्रंथों की रचना की। इसी के साथ उनके साहित्य और जीवन पर 100 से अधिक पीएचडी शोध कार्य पूरे हो चुके हैं जो उनके प्रभाव और अध्यात्मिक विरासत को प्रमाणित करते हैं। 18 फरवरी 2024 को उन्होंने तीन दिनों के दीर्घ उपवास और पूर्ण मौन के उपरांत शांत चित्त से देह त्याग किया। सांसद जैन ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि आचार्य विद्यासागर महाराज को राष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया जाना चाहिए।