आगरा एयरफोर्स स्टेशन पर आपदा प्रबंधन (राहत व बचाव कार्यों और बेहतर प्रयासों) के लिए आसियान देशों का संयुक्त अभ्यास हो रहा है। मंगलवार को आपदा प्रबंधन की क्षमता वृद्धि एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एयरफोर्स स्टेशन आगरा में आसियान देशों के आपदा प्रबंधन अभ्यास ‘समन्वय 2022’ में सैन्य व आपदा एजेंसियों के प्रतिनिधियों से कहा कि भूकंप, बाढ़, तूफान, सुनामी कभी देश देखकर नहीं आते। आपदा किस पर कहर बरपाएगी कोई नहीं जानता। एशिया हो या विकसित देश, जब भी कोई आपदा आई भारत ने राहत पहुंचाई। भारत की ताकत में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। आपदा में राहत की क्षमता बढ़ी है। हमें और क्षमता वृद्धि के लिए साझा सहयोग की जरूरत है।
विज्ञापन
आगरा एयरफोर्स स्टेशन पर 28 से 30 नवंबर तक आपदा प्रबंधन (राहत व बचाव कार्यों और बेहतर प्रयासों) के लिए आसियान देशों का संयुक्त अभ्यास हो रहा है। पहले दिन सोमवार को रक्षा प्रबंधन पर विचार व अनुभव साझा हुए हैं। दूसरे दिन मंगलवार को आपदा प्रबंधन की क्षमता वृद्धि एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया।
सीडीएस ने भेंट किया स्मृति चिन्ह
सबसे पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने रक्षामंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया। फिर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आसियान देशों के सशस्त्र बलों, एजेंसियों व एनडीएमए, एनआईडीएम, एनडीआरएफ, डीआरडीओ, आईएमडी, एनआरएस और आईएनसीओआईएस के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि मैं इस अभ्यास का साक्षी बना।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि 2015 में यमन में ऑपरेशन राहत से भारत ने 40 नागरिकों की जान बचाई। श्रीलंका, इंडोनेशिया आदि देशों में भी आपदाग्रस्त इलाकों में पहुंच कर भारत ने सराहनीय प्रयास किया है। रेयर डिजास्टर अब रेयर नहीं रहे। पिछले दशकों के अनुभव, सूचना, संसाधन और विशेषज्ञता से भारत मित्र राष्ट्रों की आपदा में राहत के लिए सक्षम है।
समन्वय बिगड़ने से अनहोनी
रक्षामंत्री ने समन्वय के बारे में बताते हुए कहा कि यह सृष्टि समन्वय से चल रही है। पुरुष और प्रकृति का समन्वय है। जब यह समन्वय बिगड़ता है तो अनहोनी होती है। जलवायु परिवर्तन होता है। प्राकृतिक आपदाएं आती हैं। जान माल को नुकसान होता है। संकट से निपटने के लिए मेक इन इंडिया के तहत संसाधन विकसित हो रहे हैं। जिससे कि विनाश की स्थिति में मानवीय जीवन बचाया जा सके।
आपसी सहयोग से राहत
रक्षामंत्री ने एक नाव में छेद होने का उदाहरण देते हुए कि आपदा की स्थिति में किसी एक की जिम्मेदारी नहीं होती। आपदा से निपटने के लिए साझा सहयोग जरूरी है। हर देश के पास खास उपकरण व अनुभव है जिसे एक-दूसरे सहयोग से राहत संभव होती है। बेहतर परिणाम आते हैं। उन्होंने आपदा का पूर्व अनुमान, सर्विलांस, चिकित्सा व संसाधनों के स्तर को ऊंचा रखने की बात कही।
आग लगने पर न खोदें कुआं
रक्षामंत्री ने कहा कि आग लगने पर हमें कुआं न खोदना पड़े, इसके लिए पहले से तैयारी होनी चाहिए। क्योंकि आपदा की पूर्व जानकारी से हजारों जीवन बचाए जा सकते हैं। बचाव ही आपदा से निपटने का सर्वोत्तम उपाय है। अभ्यास के दौरान मध्य वायु कमान के एयर चीफ वीआर चौधरी सहित तमाम सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। तीन दिनी संयुक्त अभ्यास में आसियान देशों से वियतनाम, म्यांमार, फिलिपींस, थाईलैंड, कम्बोडिया, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर आदि शामिल हुए हैं।