सम्मेलन में रक्षा मंत्री का स्वागत करते पदाधिकारी।
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खटीक समाज का इतिहास राष्ट्रभक्ति, त्याग, पराक्रम और वीरता से भरा है। इसके बावजूद इतिहासकारों ने समाज के योगदान को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया, जिसका वह हकदार है। इसलिए अब इतिहास के पुनर्लेखन की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ी समाज के त्याग और समर्पण से प्रेरणा ले सके। ये बातें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को खंदारी स्थित आरबीएस कॉलेज के राव कृष्णपाल सिंह ऑडिटोरियम में कही।
वह अखिल भारतीय खटीक समाज की ओर से आयोजित खटीक गर्जना सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि संबोधन कर रहे थे। संत दुर्बल नाथ की 165वीं जयंती पर उन्हें नमन करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वे पूरे भारतीय समाज के संत थे। वैदिक काल से लेकर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, भारत-विभाजन के पीड़ितों की सहायता और राम मंदिर आंदोलन तक खटीक समाज हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहा है। दक्षिण भारत में संत कन्नप्पा नयनार का भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण इस समाज की भक्ति-परंपरा का अद्वितीय उदाहरण है।
बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मूल मंत्र शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो का स्मरण कराते हुए रक्षा मंत्री ने समाज से अपील की कि अपनी मेहनत की परंपरा को बच्चों की उच्च शिक्षा से जोड़ें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वंचित और पिछड़े वर्ग के युवाओं के लिए छात्रवृत्ति, विदेशों में पढ़ाई के लिए सहायता और मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग जैसी योजनाएं चला रही है। कार्यक्रम का संचालन खटीक समाज संगठन के राष्ट्रीय महासचिव संतोष चक ने किया।
इस दाैरान अखिल भारतीय खटीक समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया, बुलंदशहर सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री भोला सिंह, पूर्व विधायक शिव सिंह चक, राम तीरथ, कार्यक्रम संयोजक हेमंत चलनीवाले, गौरव चक, कुसुमलता वर्मा, डॉ़ विनोद धारिया, गौरव सेजवार व अन्य समाज के लोग मौजूद रहे।