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अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित दीप्ति शर्मा ने कहा, मुझे गर्व है कि मैं लड़की हूं, ताजनगरी की बेटियों को समर्पित

Sun, 30 Aug 2020 01:19 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • दीप्ति ने कहा, पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी आगे आएं लड़कियां
  • पुरस्कार से जिम्मेदारी बढ़ी, अभ्यास का समय बढ़ाऊंगी
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अर्जुन अवार्ड के साथ दीप्ति शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की हरफनमौला खिलाड़ी दीप्ति शर्मा ने अपना अर्जुन पुरस्कार ताजनगरी की बेटियों को समर्पित किया है। पुरस्कार प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह एक लड़की हैं।
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पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अमर उजाला से फोन पर बातचीत में दीप्ति ने कहा कि युवतियां किसी भी क्षेत्र में युवकों से पीछे नहीं हैं। लक्ष्य निर्धारण के साथ ही पूरी ईमानदारी से की गई मेहनत एक दिन रंग जरूर लाती है। खेल में परिवार के सहयोग पर उन्होंने कहा कि मेरी मां, पिता और भाइयों के सहयोग के बिना यह मुकाम पाना संभव नहीं था। साथ ही पथ प्रदर्शक हेमलता काला और रीटा डे ने हर कदम पर मनोबल बढ़ाकर रखा। 

उन्होंने शहर की प्रत्येक बेटी से पढ़ाई के साथ खेलने का आह्वान किया। दीप्ति ने कहा कि मुझे इस बात का हमेशा गर्व रहा कि मैं एक लड़की हूं। साथ ही कोशिश रही कि उन लोगों की मानसिकता बदल सकूं, जो यह सोचते हैं कि खेल के मैदान बेटियों के लिए नहीं बने हैं। उन्होंने कहा कि पुरस्कार मिलने के बाद जिम्मेदारी और बढ़ गई है। इसलिए वह अपना अभ्यास का समय भी बढ़ाने जा रही हैं।
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दुनिया की सबसे खुशनसीब मां हूं: सुशीला शर्मा
जूनियर हाईस्कूल, कलवारी से सेवानिवृत्त दीप्ति की मां सुशीला शर्मा ने जब अपनी बेटी को अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करते देखा, तो घर में उन्होंने अपने बेटे सुमित को सीने से लगा लिया। अमर उजाला से बातचीत में बोलीं कि दुनिया की सबसे खुशनसीब मां हूं मैं। मेरी बेटी ने वो कर दिखाया, जो किसी भी मां के लिए एक सपना होता है। 

पिता होने पर नाज: श्रीभगवान शर्मा
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य दीप्ति शर्मा के पिता श्रीभगवान शर्मा बोले कि उन्हें दीप्ति का पिता होने पर नाज है। आज दुनिया उन्हें दीप्ति के नाम से जानती है। बेटी को अर्जुन पुरस्कार मिलने की खुशी का इजहार वह शब्दों में नहीं कर सकते। एक पिता के लिए इससे बड़ी बात कोई दूसरी नहीं हो सकती कि जिस दौर में बेटियों को खेलने से रोका जाता था, उस दौर में दीप्ति ने चुनौतियों को स्वीकार करते हुए देश की महिला खिलाड़ियों के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया।

कोच होने पर गर्व: सुमित शर्मा
महिला क्रिकेटर दीप्ति शर्मा के कोच होने पर मुझे गर्व है। कोच और दीप्ति के बड़े भाई सुमित शर्मा ने इन शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी। अमर उजाला से बातचीत में सुमित ने बताया कि दीप्ति ने उनकी हर सीख पर अमल किया। मैदान में पहली बार उनको समझाया था कि अभ्यास के समय मुझे कभी भाई नहीं समझना। मैदान में मैं केवल कोच हूं। दीप्ति ने इसे हमेशा याद रखा। अर्जुन पुरस्कार मिलने पर कोच के रूप में मैं उसे बधाई देता हूं। 
 
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