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भाजपा को 'ताकत' देने वाले दीनदयाल का गांव आज भी खारा पानी पीने को मजबूर

Tue, 02 Apr 2019 12:06 PM IST
मुकेश कुमार पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
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नगला चंद्रभान में पेयजल के लिए होता टैंकर का इस्तेमाल - फोटो : अमर उजाला
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय का गांव नगला चंद्रभान। मथुरा से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव का नाम देश ही नहीं विदेशों तक है। जहां भी दीनदयाल उपाध्या का जीवन परिचय पढ़ा जाएगा, वहां नगला चंद्रभान का भी जिक्र आएगा। 
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लेकिन भाजपा को ताकत देने वाले दीनदयाल का गांव अभी भी विकास की छांव से काफी दूर है। पहले के मुकाबले तो हालात सुधरे हैं लेकिन अभी भी बहुत कुछ चाहिए। अगर गांव वालों से पूछेंगे तो कहेंगे कि गांव के विकास के लिए दावे तो बहुत हुए हैं, काम कम हुआ है।

अगर आप कभी आगरा-दिल्ली हाईवे से गुजरेंगे तो फरह कस्बे से एक रास्ता सीधे नगला चंद्रभान के लिए जाता है। इस गांव की आबादी ढाई से तीन हजार के करीब होगी। दीनदयाल उपाध्याय का गांव है, इसलिए यहां भाजपा, संघ और कई अन्य पार्टियों के दिग्गज नेताओं का आना जाना भी लगा ही रहता है। 
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खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम लोग आ चुके हैं। हर साल पंडित दीनदयाल का जन्मोत्सव भी धूमधाम के साथ यह गांव मनाता है। जन्मोत्सव पर आने वाले नेता इस गांव को विकास के बड़े बड़े ख्वाब भी दिखाते हैं। लेकिन ख्वाब पूरे हो नहीं पा रहे। 

इस गांव निवासी मोनू तिवारी कहते हैं कि पहले से तो बदलाव हुआ लेकिन अभी भी सबसे बड़ी समस्या इस गांव में पानी की है। खारा पानी है। मीठे पानी के लिए गांव से एक किलोमीटर दूर नलकूप पर जाना पड़ता है। या फिर लोगों को आरओ वाटर खरीदना पड़ता है। 

प्रकाश चंद्र पाठक कहते हैं कि गांव में पानी की टंकी बनवाने का दावा करीब दस साल से किया जा रहा है। पानी की टंकी बन जाए तो काफी लाभ होगा। जब भी बड़े बड़े मंत्री गांव में आते हैं तो उनसे वह लोग मांग भी करते हैं। 

वादे जो आज तक पूरे नहीं हो सके

नगला चंद्रभान के युवा और बच्चे - फोटो : अमर उजाला
तारा सिंह का कहना है कि गांव में जो पानी की निकासी के लिए नालियां बनी हैं वह इस तरह की हैं कि साफ नहीं हो पातीं। बरसात में जलभराव हो जाता है। विकास कुमार कहते हैं कि गांव में आयुर्वेदिक अस्पताल ही है। अगर कोई बीमार हो जाए तो गांव से बहुत दूर मथुरा जाना पड़ता है।      

- दीनदयाल धाम को पर्यटन स्थल बनाया जाना था।
- गांव में अस्पताल खोला जाएगा।
- मीठे पानी की सप्लाई की जाएगी।
- कुटीर उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा।
- बड़ी गोशाला का निर्माण किया जाएगा।
- दीनदयाल धाम रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव बढ़ेगा।
- बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
- आसपास के गांवों में भी विकास कराया जाएगा।
- फरह ब्लाक को आदर्श ब्लाक रूप में तैयार करेंगे।
 
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स्टेशन तो बना पर ट्रेनें नहीं रुकतीं

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम से रेलवे स्टेशन तो बन गया है लेकिन ट्रेनों का ठहराव नहीं है। एक इंटरसिटी और एक पैसेंजर केवल रुकती हैं। अगर यहां के लोगों को आगरा-दिल्ली जाना होता है तो वह मथुरा आकर ट्रेन पकड़ते हैं। 

ट्रेनों के ठहराव की मांग पिछले कई साल से की जा रही है लेकिन हर बार इस गांव की मांग अनसुनी होकर रह जाती है। रेलमंत्री भी इस गांव में आकर ट्रेनों का ठहराव कराने का आश्वासन दे चुके हैं लेकिन आज भी केवल आश्वासन तक ही निर्भर हैं। 

इस गांव के जगत सिंह, कुलदीप, शोभित का कहना है कि ट्रेनों का ठहराव हो जाए तो गांव के लोगों काफी राहत मिल जाए। बताया जाता है कि पहले यह स्टेशन केवल एक हाल्ट हुआ करता था लेकिन अब भाजपा सरकार ने इसे स्टेशन बनाया है।
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