आगे और पीछे की सीटों के बीच दब गए थे जायसवाल
कार चालक पंकज ने बताया कि हादसे के समय एसीएम जायसवाल पीछे की सीट पर बैठे थे। बस में टक्कर लगने के बाद वह आगे और पीछे की सीट के बीच दब गए थे। उस समय वह ठीक थे और बातचीत भी कर रहे थे। यूपीडा के कर्मियों ने पहले उसे और बाद में अधिकारी को बाहर निकाल कर मेडिकल कॉलेज सैफई में भर्ती कराया।
हादसे के बाद पत्नी व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
राजेश जायसवाल नायब तहसीलदार के पद नियुक्त हुए थे। वर्ष 2018 में वह पदोन्नत होकर पीसीएस बने थे। उनका परिवार गायत्रीपुरम, गोमती नगर, लखनऊ में रहता है। हादसे में उनकी मौत की खबर मिलने के बाद घर में मातम छा गया। पत्नी अलका जायसवाल सैफई पहुंचीं। उनका एक बेटा और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी मेडिकल की तैयारी कर रही है। हादसे के बाद पत्नी-बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। पोस्टमार्टम के बाद शव पैतृक शहर देवरिया ले जाया जाएगा।
राजस्व परिषद की बैठक में शामिल होना था
अपर नगर मजिस्ट्रेट राजेश जायसवाल शुक्रवार की सुबह करीब छह बजे चालक के साथ लखनऊ से निकले थे। उन्हें आगरा में अध्यक्ष राजस्व परिषद आईएएस अनिल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शामिल होना था, मगर करहल क्षेत्र में हुए हादसे में उनकी जान चली गई।
प्राइवेट आईटीआई के फर्जीवाड़े की जांच कर रहे थे अपर नगर मजिस्ट्रेट
अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम) तृतीय राजेश कुमार जायसवाल की सड़क हादसे में हुई मौत पर राष्ट्रीय छात्र परिषद ने सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि एसीएम तृतीय प्राइवेट आईटीआई कॉलेजों में फर्जीवाड़े की जांच कर रहे थे। उन पर शिक्षा माफिया का दबाव था। ऐसे में उनकी मौत को महज एक सड़क दुर्घटना के रूप में लेने की बजाय हादसे के कारणों की विस्तार से जांच होनी चाहिए। इस संबंध में छात्र परिषद ने डीएम को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। यह पत्र सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।
छात्र परिषद के अध्यक्ष रौनक ठाकुर ने कहा कि राजेश जायसवाल ईमानदार और निष्ठावान अधिकारी थे। हाल ही में संगठन की ओर से फर्जी आईटीआई कॉलेज की जांच के लिए दिए गए ज्ञापन के बाद उन्होंने कई आईटीआई कॉलेजों का भौतिक सत्यापन भी किया था। परिषद अध्यक्ष ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि इस जांच को प्रभावित करने के लिए लंबे समय से जायसवाल पर दबाव डाला जा रहा था। ऐसे में अचानक सड़क हादसे में उनका निधन संदेहास्पद प्रतीत होता है। संगठन ने उच्च स्तरीय जांच एजेंसी से इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है।
ग्रामीणों से विवाद के बाद एसडीएम पद से हटाए गए थे राजेश जायसवाल
आगरा। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे पर शुक्रवार को हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एसीएम तृतीय राजेश कुमार जायसवाल को हाल ही में एसीएम तृतीय का चार्ज मिला था। मूल रूप से देवरिया के रहने वाले राजेश कुमार पहले किरावली के एसडीएम थे। उस दाैरान कीरम गांव में नाली निकासी को लेकर उनका ग्रामीणों के साथ विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों ने उनकी सरकारी गाड़ी रोककर विरोध किया और नौबत हाथापाई तक पहुंच गई थी। विवाद को शांत करने के लिए डीएम ने उन्हें एसडीएम पद से हटाकर एसीएम तृतीय बना दिया था। उससे पहले महाराजगंज जिले में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रहते हुए भी वह एक विवाद में उलझ गए थे।