ट्रांसपोर्ट नगर में व्यवसाय के उद्देश्य से लिए गए भूखंडों के पट्टों का नवीनीकरण नहीं कराया गया है। नगर पालिका द्वारा 30 साल पहले 30 साल के लिए इन भूखंडों का आवंटन किया गया था। 30 साल की समय सीमा बीतने के बाद भी नवीनीकरण नहीं होने से पट्टों की वैधानिकता कानूनी तौर पर समाप्त हो चुकी है। इसके बाद भी नगर पालिका ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
शहर के बाईपास रोड पर बने ट्रांसपोर्ट नगर में हर जगह खेल सामने आने लगा है। तकालीन डीएम रोहित नंदन की पहल पर बने ट्रांसपोर्ट नगर में कई दुकानों का तो 30 साल बाद भी निर्माण पूरा नहीं हु्रआ है। कई दुकानों में आज भी ताले ही झूल रहे हैं। जिस समय भूखंडों का आवंटन हुआ था उस समय 30 साल का पट्टा दिया गया था। वर्ष 1991 से वर्ष 1993 के बीच दिए गए पट्टों की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। लेकिन इन पट्टों का नवीनीकरण नहीं कराया गया है। कुछ भूखंडों पर तो आवंटियों ने आलीशान मकान तक बना लिए हैं।
संगठित विकास योजना के तहत बनाए गए ट्रांसपोर्ट नगर की चार साल पहले हुई जांच भी फाइलों में बंद है। व्यापारियों का कहना है कि नगर पालिका कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। सरकार को करोड़ों रुपयों का चूना लग रहा है। पट्टे की समय सीमा समाप्त होने के बाद नवीनीकरण नहीं होने पर नगर पालिका को कार्रवाई करनी चाहिए थी। नगर पालिका राजनैतिक रसूखदारों के आगे नत मस्तक होती जा रही है।
बंद हो गया पेट्रोल पंप
ट्रांसपोर्ट नगर बसने के बाद ट्रांसपोर्ट नगर में शीला फिलिंग स्टेशन के नाम से पेट्रोल पंप की स्थापना हुई थी। जब ट्रांसपोर्ट नगर बंद होने लगा तो पेट्रोल पंप के घाटे में होने के कारण उसको भोगांव रोड पर संचालित किया गया। बाद में भोगांव रोड से हटाकर अब आगरा में यही पेट्रोल पंप संचालित किया जा रहा है। ट्रांसपोर्ट नगर में संचालित होने वाले एआरटीओ कार्यालय को भी कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचा दिया गया है।
मामला पुराना होने के कारण जानकारी नहीं है। ट्रांसपोर्ट नगर वाली फाइल का अध्ययन करके ही जानकारी करने के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - बुद्धिप्रकाश, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका