उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी की तलहटी में सिल्ट और प्लास्टिक जम गई है। इससे भूजल रिचार्ज बंद हो गया है। ऐसे में यमुना में पानी कम होने के कारण प्रदूषण बढ़ेगा। इससे तास सहित अन्य स्मारकों गोल्डी काइरोनोमॉस जैसे कीड़ों का हमला बढ़ सकता है। इसकी डी-सिल्टिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस पर 22 अप्रैल को सुनवाई होगी।
यमुना पर बैराज की मांग चार दशक से उठ रही है। तीन बार शिलान्यास के बाद भी बैराज नहीं बना। 2017 में सूबे की कमान संभालने के बाद पहली बार सीएम योगी आगरा आए थे। तब उन्होंने ताजमहल के पार्श्व में नगला पैमा में रबर डैम की घोषणा की थी। बजट मिला लेकिन सालभर बाद भी बैराज तो क्या रबर डैम तक नहीं बन सका।
अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि यमुना में 90 नाले गिरते हैं। इनमें 30 आंशिक रूप से टैप हैं। 60 नाले गंदगी घोल रहे हैं। इसके कारण यमुना में कीड़े पनप रहे हैं, जो ताजमहल सहित यमुना किनारे बने अन्य स्मारकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।