भाजपा में उठने लगे बगावत के सुर
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दल बदल कर आए नेताओं के चक्कर में भाजपा ने वर्षों से जुड़े कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया है। इससे पार्टी में बगावत के स्वर उठने लगे हैं। टिकट पाने के लिए पिछले कई वर्षों से मेहनत कर रहे दावेदारों ने अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।
चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में हेमलता दिवाकर, पक्षालिका सिंह, छोटेलाल वर्मा, जितेंद्र वर्मा, अंजुला सिंह माहौर, अरिदमन सपा छोड़कर आए थे। ये सभी टिकट के दावेदार थे। इनके अलावा पार्टी में वर्षों से जुड़े कई और दावेदार भी एड़ी चोटी का जोर लगा रहे थे लेकिन भाजपा आलाकमान ने पैराशूटर्स पर भरोसा किया। आगरा ग्रामीण पर पार्टी के चेहरों को छोड़कर सपा से आईं हेमलता दिवाकर, बाह से पक्षालिका सिंह और फतेहाबाद से भी सपा छोड़कर आए जितेंद्र वर्मा को टिकट दिया है। इससे पार्टी में नाराजगी है। हालांकि अंजुला सिंह भी पार्टी छोड़कर सपा में चली गई थीं लेकिन उनकी वापसी के बाद उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा था। अंजुला को टिकट न मिलने पर उनके समर्थकों ने सेक्टर चार में विरोध प्रदर्शन किया। समर्थकों के निशाने पर सांसद रामशंकर कठेरिया रहे। उनका कहना था कि रामशंकर कठेरिया ने अंजुला को टिकट नहीं मिलने दिया। यहीं नहीं भाजपा ने अपनी पार्टी की किसी महिला को टिकट से नहीं नवाजा। दोनों महिला प्रत्याशी सपा छोड़कर आई हैं। अंजुला का कहना है कि पार्टी का यह विशेषाधिकार है। पार्टी ने चुनाव लड़ाने की भूमिका दी है निभाएंगे।
छोटेलाल: न इधर के रहे न उधर के रहे
बसपा से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे छोटेलाल वर्मा सपा के खेमे में पहुंच गए थे लेकिन वहां भी हालात पक्ष में नहीं दिखे तो उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। उम्मीद थी कि पार्टी फतेहाबाद विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाएगी लेकिन सोमवार को जारी सूची में उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। बसपा छोड़ी, सपा छोड़ी अब भाजपा ने भी ठेंगा दिया। अब परेशान हैं कि कहां जाएं। न इधर के रहे और न उधर के रहे। उनसे जब पूछा गया कि पार्टी के निर्णय पर क्या कहना है तो उनका कहना है कुछ नहीं कहना है पार्टी का निर्णय है। जितेंद्र वर्मा पार्टी को बेहतर प्रत्याशी लगे हैं। यह राजनीति है आगे क्या होगा इसके संबंध में कुछ नहीं कहना है।
राजकुमार कल करेंगे किसान सेना की बैठक
फतेहपुर सीकरी विधानसभा से टिकट मांग रहे राजकुमार चाहर ने टिकट मिलने पर कोई सीधी प्रतिक्रिया तो नहीं की है लेकिन उन्होंने किसान सेना, अपने समर्थकों और शुभचिंतकों की बैठक बुलाई है। उस बैठक में आगे की रणनीति तय होगी। खेरागढ़ से टिकट मांग रहे अमर सिंह परमार का कहना है कि भाजपा ने करीब 1.25 लाख क्षत्रिय और ब्राह्मणों को दरकिनार कर 14 हजार वैश्यों पर भरोसा जताया है। पार्टी के इस निर्णय से मन दुखी है। मैं पिछले पांच वर्ष से मेहनत कर रहा था।