आगरा में आरटीओ और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रही है। न ऑक्सीजन है और न मेडिकल किट, अग्निशमन यंत्र भी नहीं है, ऐसी खटारा एंबुलेंस से मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। आरटीओ और स्वास्थ्य विभाग भी जांच नहीं कर रहा, इससे मरीजों की जान खतरे में है।
आरटीओ के यहां पर लगभग 450 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें अधिकांश की फिटनेस जांच नहीं हुई है। इनमें चिकित्सकीय मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसी डग्गामार एंबुलेंस का रामबाग चौराहा, दिल्ली गेट, सिकंदरा, आवास विकास कॉलोनी, एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी पर जमावड़ा लगा रहता है। ये सुविधाएं न होने पर भी तीमारदारों से पूरा किराया वसूल रहे हैं।
ये मानक हैं जरूरी
अग्निशमन यंत्र, मेडिकल किट में 70 तरह की दवाएं, ऑक्सीजन सिलिंडर, मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए अंबू बैग, स्ट्रेचर, सायरन, दुरुस्त लाइट, एंबुलेंस के आगे और पीछे एंबुलेंस लिखा होना जरूरी है।
फिर से अभियान चलाकर मानक देखेंगे
आरटीओ प्रवर्तन अनिल कुमार ने बताया कि बीते दिनों डग्गमार एंबुलेंस पकड़ कर चालान किए, सील भी कीं। इनके खिलाफ फिर से अभियान चलाकर जांच कराते हुए चिकित्सकीय मानकों की पड़ताल करेंगे।
आरटीओ टीम बनाएं एसीएमओ को भेजेंगे
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी पांडेय ने कहा कि आरटीओ टीम बनाएं और उसमें एसीएमओ भेजकर चिकित्सकीय मानकों की जांच कराएंगे। बिना मानकों की एंबुलेंस को सील करते हुए जुर्माना भी लगाया जाए।
केस-एक
बीते साल अप्रैल में यमुनापार स्थित अस्पताल से एंबुलेंस में प्रसूता और नवजात मैनपुरी जा रहे थे, रास्ते में ऑक्सीजन खत्म हो गई, दो तीन अस्पतालों में एंबुलेंस चालक ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए चक्कर काटता रहा, तब तक नवजात की मौत हो गई।
केस-दो
बीते शुक्रवार को ही एमजी रोड स्थित अस्पताल में बुजुर्ग की ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो गई। इसमें भी एंबुलेंस में ऑक्सीजन न होने के आरोप लगे। मौत के बाद परिजनों ने हंगामा भी किया।
केस-3
इस साल फरवरी में आगरा से दिल्ली के लिए गंभीर हालत में 65 वर्षीय बुजुर्ग को रेफर किया गया था, लेकिन एंबुलेंस में रास्ते में ही ऑक्सीजन खत्म होने के कारण मौत हो गई। परिजनों की शिकायत को तब नजर अंदाज कर दिया गया था।