साइबर शातिरों ने युवक को एक ग्रुप से जोड़ा। ग्रुप से जुड़ने के बाद कुछ दिन तक शेयर बाजार की जानकारी दी गई। इसके बाद आरोपियों ने डीमैट खाता खुलवाने के लिए कोनाइफर नाम का एप डाउनलोड कराया। शुरुआती निवेश पर मुनाफा दिखाकर विश्वास जीता गया। इसके बाद निकासी पर रोक लगा दी।
शेयर बाजार की बारीकियां सिखाने के बहाने साइबर अपराधियों ने युवक को वॉट्सएप ग्रुप से जोड़ा। आईपीओ में निवेश के नाम पर फर्जी डी मैट खाता खुलवाया। कई बार में 13.55 लाख रुपये ले लिए। रकम निकालने के प्रयास पर संपर्क बंद कर दिया। शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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न्यू आगरा के नगला पदी निवासी मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें वॉट्सएप पर शेयर बाजार की बारीकियां सीखने और निवेश से जुड़ा संदेश मिला था। ग्रुप से जुड़ने के बाद कुछ दिन तक शेयर बाजार की जानकारी दी गई। इसके बाद आरोपियों ने डी-मैट खाता खुलवाने के लिए कोनाइफर नाम का एप डाउनलोड कराया। एप पर सेबी के नाम से फर्जी पंजीकरण नंबर भी प्रदर्शित किया गया था। पीड़ित के अनुसार शुरुआती निवेश पर मुनाफा दिखाकर उनका विश्वास जीता गया।
इसके बाद आईपीओ अलॉटमेंट के नाम पर पहले एक निवेश कराया गया। भुगतान करने के बाद दूसरा और फिर तीसरा आईपीओ अलॉटमेंट दिखाकर लगातार अधिक रकम जमा करने का दबाव बनाया गया। आरोपियों ने कहा कि यदि अगला भुगतान नहीं किया गया तो पहले से अलॉट हुए आईपीओ बेचे नहीं जा सकेंगे।
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जब मयंक ने आगे निवेश करने से मना किया और अपनी जमा पूंजी वापस मांगी तो एप में दिखाई जा रही करीब 13.55 लाख रुपये की राशि की निकासी (विदड्रॉल) बंद कर दिया गया। ठगी का नेटवर्क करण सिंह और आलोक नाम के व्यक्ति चला रहे हैं। पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। आईपी एड्रेस, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिये आरोपियों की तलाश की जा रही है।