आगरा में साइबर अपराधियों ने दिल्ली विकास प्राधिकरण की सेवानिवृत्त क्लर्क के मोबाइल पर एप डाउनलोड करके खाते से 40 हजार रुपये निकाल लिए। उन्होंने ऑनलाइन मंगाई एलईडी की जानकारी के लिए इंटरनेट से हेल्प लाइन नंबर लिया था।
यह नंबर साइबर अपराधियों का निकला। उसने एप डाउनलोड कराने के बाद खाते में ट्रांजेक्शन कराकर जानकारी ले ली थी। पीड़ित ने साइबर सेल में शिकायत की है। मामले की पुलिस जांच कर रही है।
आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर नौ निवासी रितु कत्याल (60) ने गुरुवार को ऑनलाइन एलईडी बुक कराया था। इसके लिए 12,499 रुपये ऑनलाइन जमा कराए थे।
गूगल पर सर्च किया था हेल्पलाइन नंबर
रितु कत्याल के बेटे रोहित ने बताया कि एलईडी बुक होने के बावजूद कंफर्मेशन का मैसेज नहीं आया था। इस पर मां ने कंपनी का हेल्पलाइन नंबर गूगल पर सर्च किया। इसमें एक नंबर मिल गया। उस पर कॉल करने वाले ने कहा कि मैसेज आ जाएगा। इसके लिए एक एप डाउनलोड करना होगा।
रितु से एनी डेस्क एप डाउनलोड करा दिया। इसके बाद एप का नंबर पूछ लिया। बाद में गूगल पे से एक रुपये का ट्रांजेक्शन करने की कहकर एटीएम कार्ड की जानकारी ले ली।
बाद में रितु के खाते से 40 हजार रुपये दो बार में ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए। मोबाइल पर मैसेज आने पर रितु को पता चला। उन्होंने बैंक में कॉल करके खाता बंद करा दिया। इसके बाद साइबर सेल और थाना सिकंदरा पुलिस से शिकायत की।
एप डाउनलोड न करें
साइबर सेल एक्सपर्ट के मुताबिक, इंटरनेट पर साइबर अपराधियों ने अपने नंबर डाल रखे हैं। लोग हेल्पलाइन नंबर समझकर कॉल करते हैं। इस पर साइबर अपराधी एप डाउनलोड करा देते हैं। एप मोबाइल की स्क्रीन शेयर करने और एक्सेस करने के लिए होते हैं।
एप डाउन करने के बाद वॉलेट से पेमेंट करने को कहते हैं। इसलिए ध्यान रखें, फोन पर अगर कोई अंजान व्यक्ति एप डाउनलोड करने के लिए कहे तो नहीं करना चाहिए? हेल्पलाइन नंबर कंपनी की अधिकृत वेबसाइट से ही पता करना चाहिए।