उत्तर प्रदेश के आगरा में स्टॉक ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने विंग कमांडर से 1.99 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। साइबर थाना पुलिस ने इस गैंग से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक इंडसइंड बैंक का कर्मचारी है। वह चालू खाते खुलवाता था, जबकि उसका साथी खाते खुलवाने के लिए लोगों को फंसाता था।
डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि विंग कमांडर जार्ज जोसेफ के साथ धोखाधड़ी हुई थी। उनकी तहरीर पर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा लिखा गया। एसीपी हरीपर्वत आदित्य के निर्देशन में साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसके बाद संजय गांधी नगर, नौबस्ता (कानपुर नगर) निवासी अभिषेक मिश्रा व गोपालनगर काॅलोनी (कानपुर नगर) निवासी विकास त्रिवेदी को गिरफ्तार किया है।
इस तरह से कर रहे ठगी
आरोपी सोशल मीडिया पर लोगों को लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर लोगों से जुड़ते हैं। खुद को शेयर ट्रेडिंग का जानकार बताकर लोगों को सलाह देते हैं। उनका भरोसा जीतते हैं। ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कराने का झांसा देकर उनसे रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कराते हैं। बैंकों में फर्जी कंपनी दर्शाकर चालू खाते खुलवाए जाते थे। ताकि मोटे लेनदेन पर बैंक वाले शक नहीं करें।
खातों में आने वाली कुछ रकम निकाल ली जाती थी। कुछ दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। पुलिस को शक है कि गैंग के कुछ सदस्य विदेश में भी रहते हैं। वहां से ऑनलाइन खातों को ऑपरेट किया करते थे। हालांकि इस संबंध में अभी जांच जारी है। एसीपी हरीपर्वत आदित्य ने बताया कि पुलिस ने जो आरोपी पकड़े। उनसे पूछताछ के बाद कई और लोगों के नाम पता चले। गिरोह के अन्य सदस्य अलग-अलग प्रदेशों के निवासी हैं। उनकी तलाश शुरू कर दी गई है।
बैंक कर्मी ने नहीं उगले राज
पुलिस ने बताया कि अभिषेक गैंग के लिए बिना सत्यापन आईडी पर चालू बैंक खाते खुलवाने में मदद करता था। खातों में आने वाली रकम के हिसाब से उसे कमीशन मिलता था। अभिषेक एमबीए की पढ़ाई भी कर रहा है। इंडसइंड बैंक में काम करता है। वह ज्यादा पुलिस को नहीं बता सका।
विकास इंटरमीडिएट पास है। उसका काम लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनकी आईडी पर फर्जी फर्म के कागज तैयार कराने के साथ ही खाते खुलवाना था। विकास ने अपनी आईडी पर भी एक खाता खुलवा रखा था। उसे हर महीने खाते का किराया और उसमें आने वाली रकम का कमीशन मिलता था।