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14 महीनों में 30 करोड़ की ठगी: विदेश में बैठे शातिर इस तरह बना रहे भारतीयों को शिकार, बचने का ये है तरीका

Fri, 20 Mar 2026 08:45 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

साल 2025-26 के 14 महीनों में साइबर अपराधियों ने 30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की, जिसमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और विदेश तक फैले गिरोह शामिल पाए गए। पुलिस ने 120 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 7 करोड़ रुपये और संपत्ति बरामद की है तथा साइबर अपराध से निपटने के लिए प्रशिक्षण और संसाधन बढ़ाए हैं।
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cyber crime cyber fraud - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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 साइबर अपराधी केवल झारखंड और पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहे। अब उनका दायरा दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश के साथ विदेश तक पहुंच चुका है। वर्ष 2025-26 के 14 महीने में जनता से 30 करोड़ से अधिक की ठगी कर चुके हैं। पुलिस ने 120 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया। उन्हें जेल भेजा गया। करीब 7 करोड़ रुपये और संपत्ति बरामद हुए हैं।
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एडीसीपी एवं साइबर क्राइम के नोडल प्रभारी आदित्य सिंह ने बताया कि वर्ष 2024 में साइबर क्राइम थाने में 189 प्राथमिकी दर्ज हुई थी। यह आंकड़ा वर्ष 2025 में बढ़कर 209 पर पहुंच गया। 2024 में जहां 26 करोड़ से अधिक की ठगी हुई थी जो 2025 में तकरीबन 30 करोड़ रुपये तक पहुंची। पुलिस ने इनमें से करीब 22 प्रतिशत धनराशि और अन्य संपत्ति को आरोपियों से बरामद किया। साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए थाना पुलिस को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है। संसाधन भी बढ़ाए गए हैं।

 

ये हैं प्रमुख मामले
- जीवनी मंडी निवासी अनुज सिंह चाैहान ने अप्रैल 2025 में प्राथमिकी दर्ज कराई। उन्हें टेलीग्राम पर जोड़कर टास्क दिए गए। मुनाफा देने की कहकर 32 लाख की ठगी की गई।
- जिलाधिकारी की ओर से 21 जुलाई, 2025 को थाना साइबर क्राइम में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जिलाधिकारी के नाम से साइबर अपराधियों ने लोगों को व्हाट्सएप मैसेज किए थे।
- सितंबर 2025 में ट्रांस यमुना क्षेत्र निवासी एक चिकित्सक को डिजिटल अरेस्ट कर 23 लाख रुपये लिए गए।पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
- दिसंबर 2025 में एंथेला अपार्टमेंट निवासी गीता पाराशर को टेलीग्राम ग्रुप पर जोड़कर निवेश का झांसा दिया गया। उनसे 12.18 लाख रुपये की ठगी की गई।


 

संगठित गिरोह पर नई धारा में कार्रवाई
साइबर क्राइम थाने की प्रभारी रीता यादव ने बताया कि साइबर ठगी में कोई एक व्यक्ति शामिल नहीं होता है। अधिकतर मामलों में संगठित गिरोह सामने आता है। ऐसे में पुलिस भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (3) के तहत कार्रवाई करती है। इसमें ऐसे व्यक्ति को कम से कम 5 साल कारावास की सजा हो सकती है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। पांच लाख से अधिक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।

 
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ऑनलाइन गेमिंग, निवेश के नाम पर भी ठगी
एडीसीपी ने बताया कि साइबर अपराधी ठगने के नए-नए तरीके अपनाते हैं। डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर, निवेश के नाम पर, ऑनलाइन गेमिंग में फंसाकर रुपये अपने खातों में जमा करा लेते हैं। अधिकतर गिरोह दुबई, कंबोडिया, वियतनाम से संचालित हो रहे हैं। पुलिस ने पिछले दिनों विदेशी गिरोह के सदस्यों को खाते और सिम उपलब्ध कराने के मामले में आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि अपराधी चोरी और गुम हुए मोबाइल का प्रयोग भी साइबर ठगी में कर रहे हैं।
 
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