इस पर आशु ने कहा कि उसका फोनपे काम नहीं कर रहा है। उसने अपनी चचेरी बहन मानसी से बात करा दी। साइबर अपराधी ने उसके फोनपे का बैलेंस पूछा। इसके बाद 18 हजार रुपये निकालने के लिए रिक्वेस्ट मनी का लिंक भेज दिया। मानसी के क्लिक करते ही खाते से 18 हजार रुपये निकल गए। मानसी ने पूछताछ की तो फोन कट गया। आशु ने थाना न्यू आगरा और साइबर क्राइम थाना में शिकायत की।
नहीं करें लिंक पर क्लिक
साइबर सेल एक्सपर्ट के मुताबिक, साइबर अपराधी लोगों को परिचित बनकर कॉल करते हैं। उनसे किसी जानकार की तरह बात करते हैं। ऐसे में लोग झांसे में आ जाते हैं। वह वॉलेट में रुपये भेजने के बजाय खुद के वॉलेट में ट्रांसफर करने का मैसेज भेजते हैं। यह रिक्वेस्ट मनी के रूप में होता है।
इस पर क्लिक करते ही खाते से रकम कट जाती है। इसलिए वालेट में आने वाले किसी लिंक पर क्लिक नहीं करें। किसी व्यक्ति के रुपये भेजने की बात कहने पर उक्त पहचान के व्यक्ति के मोबाइल पर काल करके पता कर लें। बिना जान पहचान कभी किसी को अपनी निजी जानकारी नहीं देनी चाहिए।
साइबर अपराधः दस साल में 50 करोड़ की ठगी, खातों में सेंधमारी का लेते थे विशेष प्रशिक्षण