साइबर अपराधी लोगों के खातों से रकम निकालने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। बैंक मैनेजर ही नहीं, रिश्तेदार और दोस्त तक बनकर कॉल कर रहे हैं। खातों की जानकारी लेकर रकम साफ कर रहे हैं। आगरा में पिछले दिनों साइबर सेल में कई मामले ऐसे आए हैं। पुलिस लोगों को फोन पर किसी व्यक्ति को खाते संबंधी जानकारी नहीं देने की सलाह दे रही है।
जीजा जी कहकर लगाया चूना
हाथरस निवासी मुकेश गौतम के परिवार में नवंबर 2019 में शादी थी। उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि जीजा जी मैंने सामान खरीद लिया है। लेकिन, कुछ रुपये कम पड़ रहे हैं। ऑनलाइन पेमेंट करना है। आप खाते की जानकारी दे दो।
काम में व्यस्त होने के कारण मुकेश ने भी उसे साला समझकर खाते की जानकारी दे दी। कुछ देर में उनके खाते से 1.25 लाख रुपये निकल गए। यह रकम एक अन्य खाते में ट्रांसफर कराकर निकाल ली गई।
दोस्त का भाई बताकर पेटीएम से पार किए 28 हजार
आगरा के सदर क्षेत्र के एक छात्र के पास दिसंबर 2019 में एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को उसके दोस्त का भाई बताया। उससे कहा कि मैं कुछ पैसा भेज रहा हूं, इसे भाई को दे देना।
इसके बाद छात्र से पेटीएम का नंबर ले लिया। उससे एक लिंक पर क्लिक करने के लिए बोल दिया। छात्र के क्लिक करते ही खाते से 28 हजार रुपये निकल गए। उसने साइबर सेल में शिकायत की।
मित्र को रुपये भेजने का झांसा देकर 40 हजार निकाले
सदर क्षेत्र निवासी एक एसोसिएशन के पदाधिकारी के पास तीन फरवरी को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को उनके एक परिचित दरोगा के नाम से बात की। कहा कि वह अपने एक मित्र के पास रुपये भेजना चाहते हैं, लेकिन उस पर पेटीएम नहीं है, इसलिए अपना नंबर दे दो। रुपये तुम दे देना।
पदाधिकारी ने अपने बेटे का नंबर दे दिया। साइबर अपराधी ने उसके पास कॉल किया। पेटीएम नंबर लेकर ओटीपी बताने के लिए बोल दिया। इसके बाद उनके खाते से 40 हजार रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की थी।
न खाते की जानकारी दें, न ओटीपी बताएं
साइबर सेल एक्सपर्ट के मुताबिक, फोन पर खाते संबंधी जानकारी नहीं देनी चाहिए। यदि, कोई अपना परिचित बताता है तो पड़ताल करें। ओटीपी किसी को न बताएं। जिस किसी का नाम लेकर बात की जा रही है उसका नंबर मिलाकर पता करें। इसके बाद ही भरोसा करना चाहिए।