उत्तर प्रदेश के आगरा में साइबर अपराधी आमजन ही नहीं, खाकी वालों को भी शिकार बना रहे हैं। ट्रेजरी अफसर होने का झांसा देकर चार सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों से 49 लाख रुपये ठग लिए थे। पुलिस अपने ही कर्मियों को राहत नहीं दे सकी है। एक की भी रकम अब तक वापस नहीं हो सकी है, जबकि रेंज से लेकर जिला साइबर सेल तक मामलों की जांच कर चुकी है।
मैनपुरी के बेवर निवासी राज बहादुर सिंह कालिंदी विहार स्थित नंदा सिटी में रहते हैं। 31 अगस्त 2019 को दरोगा से सेवानिवृत्त हुए। उनसे ट्रेजरी अफसर बनकर निजी जानकारी लेने के बाद खाते से 7.36 लाख रुपये निकाल लिए गए थे।
फिरोजाबाद के रहने वाले सिपाही को निवेश में मुनाफे का लालच दिया गया था। 34.93 लाख रुपये खाते में जमा करा लिए गए। इसके बाद निवेश कराने वाले के मोबाइल बंद हो गए। एक एप भी था, जिसे बंद कर दिया गया।
रेंज और जिला साइबर सेल की जांच में सामने आया कि ठगी करने वाला गैंग झारखंड का है। गैंग सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों का डाटा प्राप्त कर कॉल करता है। इसके बाद ट्रेजरी अफसर बनकर जानकारी ले लेता है। पुलिसकर्मी पेंशन और फंड की रकम जल्दी मिलने के लालच में आकर जानकारी दे देते हैं। आरोपी नेट बैंकिंग के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर लेते हैं।
पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने कहा कि जिला और रेंज साइबर सेल से जांच कराई जाती है। मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। आरोपियों की लोकेशन मिलने पर गिरफ्तारी की जाती है।