मैनपुरी। विवादित कार्यशैली के चलते एआरएम अपनी दूसरी बार की तैनाती से ही चर्चाओं में रहे हैं। संविदा कर्मियों की शिकायत पर परिवहन मंत्री तक एआरएम से नाराजगी जता चुके हैं। दो दिन पहले डीएम ने एआरएम को तलब करके विवादित कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए सुधार करने की हिदायत दी थी।
मूलरूप से कानपुर के आनंद नगर कल्याणपुर निवासी हरिदास चक की चार साल पहले एआरएम मैनपुरी के रूप में तैनाती हुई थी। तैनाती के दौरान भी उनका संविदा कर्मचारियों से कई बार विवाद हुआ था। कर्मचारियों की शिकायत पर जांच के बाद उनको मैनपुरी से हटा दिया था। सात महीने पहले ही हरिदास को दोबारा मैनपुरी डिपो में एआरएम की जिम्मेदारी मिली थी।
दूसरी बार की तैनाती के बाद से उनका कर्मचारियों से कई बार विवाद हुआ।
संविदा कर्मचारियों की शिकायत पर तत्कालीन परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी एआरएम से उनकी विवादित कार्यशैली पर नाराजगी जता चुके हैं। दो दिन पहले डीएम प्रमोद कुमार उपाध्याय ने एआरएम को तलब करके उनकी विवादित कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए सुधार करने की हिदायत दी थी।
पांच संविदा कर्मियों को किया निलंबित
संविदा कर्मचारियों का आरोप है बसों के संचालन के लिए एआरएम की मांग पूरी नहीं करने पर पांच संविदा कर्मियों को एआरएम ने एक महीने पहले निलंबित कर दिया था। इनमें चालक राजेश यादव, परिचालक सीतेश कुमार, गोविंद यादव, संजय राजपूत, प्रवीन यादव शामिल थे। उनसे बहाली के नाम पर रुपये मांगे जा रहे थे।
चुनाव के लिए नहीं दी जगह
रोडवेज संविदा कर्मचारियों की इकाई शाखा के लिए हुए चुनाव के दौरान एआरएम ने रोडवेज वर्कशॉप में जगह देने से मना कर दिया था। संगठन के प्रांतीय पदाधिकारियों के आने के बाद उनकी एआरएम से नोकझोंक हुई। इसके बाद एआरएम ने चुनाव कराने के लिए वर्कशॉप में ही उनको जगह देने का भरोसा दिया।
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं
मैनपुरी डिपो की दिल्ली मार्ग पर दो एसी बसें संचालित होती हैं। इनमें यात्रियों केे लिए पीने के पानी की बोतलों की निशुल्क व्यवस्था होती है। यात्रियों ने कई बार बसों में पानी की बोतलें नहीं मिलने की शिकायत एआरएम से की, लेकिन उनकी शिकायत पर एआरएम ने आज तक कोई कार्रवाई करना तो दूर जांच तक नहीं की। आरोप है कि एआरएम के इशारे पर ही पानी का यह गोलमाल हो रहा था।
32 चालकों को नहीं दी जिम्मेदारी
एक महीने पहले रोडवेज ने मैनपुरी डिपो में संविदा बस चालक के रूप में 32 चालकों की नियुक्ति की है। एक महीने में उनको एक बार भी बस संचालन की जिम्मेदारी नहीं दी गई है। संविदा चालकों का आरोप है एआरएम की नाजायज मांग पूरी नहीं करने केे कारण उनको बस चलाने की जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
बस संचालन के लिए करते थे उगाही
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष गोविंद यादव आरोप लगाते हैं कि एआरएम हरिदास बस संचालन के लिए उगाही करते थे। जो चालक और परिचालक उनको रुपये देते थे उनको अच्छे मार्गों वाली बसों का संचालन दिया जाता था। रूट बदलने के लिए चार से आठ हजार रुपये तक की मांग की जाती थी। इसकी शिकायत शासन तक की गई थी।