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तीर्थनगरी में अन्न क्षेत्रों में उमड़ रही संत महात्माओं की भीड़

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कासगंज के सोरों में पंचकोसीय परिक्रमा करते आरएसएस के स्वयंसेवक - फोटो : KASGANJ
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सोरों(कासगंज)। तीर्थनगरी के वार्षिक मार्गशीर्ष अमृत कुंभ के अवसर पर पवित्र हरिपदी में स्नान करने व सूकरक्षेत्र की पंचकोसीय परिक्रमा में भाग लेने के लिए देश भर से संत महात्मा पहुंचे हैं। तीर्थनगरी में कई स्थानों पर संत महात्माओं के लिए धर्मप्रेमियों ने अन्न क्षेत्र खोले हुए हैं। वहीं जगह-जगह धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं और संतों के द्वारा प्रवचन किए जा रहे हैं।
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तीर्थनगरी के पौराणिक महत्व के कारण वर्तमान में दो हजार से अधिक संत महात्मा तीर्थनगरी में प्रवास कर गंगा स्नान, परिक्रमा, कल्पवास का पुण्य संचित कर रहे हैं। हरिपदी किनारे डेरा डालकर प्रवास कर रहे धूनी रमाये संतों के दर्शन कर उनसे परमार्थ धार्मिक चिंतन करते श्रद्धालु नजर आ रहे है। वर्तमान में तीर्थनगरी में धर्मप्रेमी श्रद्धालु व संत आश्रमों के व्यवस्थापकों द्वारा अन्न क्षेत्रों में संत महात्माओं की आवभगत कर उनको भोजन कराकर दक्षिणा दी जा रही है। स्वामी अमृतानंद सोहम आश्रम के व्यवस्थापक स्वामी अमृतानंद प्रतिदिन सुबह संतों को अमृत वचन सुनाकर अन्न क्षेत्र का आयोजन करते हैं।
उनके द्वारा अन्न क्षेत्र का आयोजन एकादशी से प्रारंभ किया गया है, जो अंतिम स्नान पर्व पूर्णिमा तक चलेगा। नागालैंड आश्रम में व्यवस्थापक सीताराम दुबे द्वारा सहयोगियों के साथ नागा साधु संतों के लिए प्रतिदिन अन्न क्षेत्र चलाया जा रहा है। मानस मंदिर व भैंरोनाथ मंदिर में समाजसेवी रामेश्वरदयाल महेरे व गिर्राज किशोर अग्रवाल सर्राफ द्वारा अन्न क्षेत्र चलाया जा रहा है। योगमार्ग स्थित स्वामी महेश दयानंद सोहम आश्रम में संत सन्यासियों के लिए अन्न क्षेत्र का आयोजन चल रहा है यहां प्रतिदिन गीतापाठ व संकीर्तन के आयोजन भी हो रहे हैं।
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ये है मान्यता, इसलिए जुटते हैं संत व श्रद्धालु
मान्यता है कि भगवान वराह ने मार्गशीर्ष मास की एकादशी को अवतरित होकर द्वादशी तिथि को अपने विशालकाय खुरों से निर्मित वराह कुंड को उत्पन्न किया था, जिसे हरिपदी गंगा भी कहते हैं। भगवान वराह ने इस कुंड में अपने शरीर का त्याग किया था। जिसके प्रभाव से यहां दिवंगतजनों की अस्थियां 72 घंटे के अंदर जल में विलय हो जाती हैं। वहीं किसी अन्य तीर्थ की अपेक्षा यहां गंगा स्नान करने से अनंत गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। इसीलिए बड़ी संख्या में स्थानीय व दूर दराज से संत व श्रद्धालु यहां मार्गशीर्ष में गंगा स्नान को पहुंचते हैं।
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