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भगवान वराह के मोक्ष दिवस पर वराह घाट पर गूंज हर हर गंगे के जयकारे

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कासगंज के सोरों में भगवान वराह की शोभायात्रा में मुख्य रथ पर विराजमान भगवान वराह की प्रतिमा - फोटो : KASGANJ
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सोरों (कासगंज)। भगवान वराह के मोक्ष दिवस मार्गशीर्ष द्वादशी के अवसर पर वराह घाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। घाट पर गंगा मैया के जयकारे गूंजते रहे। लोगों ने मंदिरों पर देव दर्शन किए और साधु व जरूरतोंमंदों को दान दक्षिणा कर पुण्य लाभ अर्जित किए।
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मान्यता है कि भगवान विष्णु के तृतीय अवतार वराह ने पृथ्वी पर अवतरित होकर हिरण्याक्ष नाम के राक्षस का वध कर पृथ्वी को रसातल से निकाला था। मार्गशीर्ष द्वादशी को अपनी देह का स्वनिर्मित हरिपदी गंगा में त्यागकर मोक्ष धाम को चले गए। इस उपलक्ष्य में इस दिन स्नान की प्राचीन परंपरा का आज निर्वहन किया गया। सुबह वराह मंदिर के महंत विदेहानंद गिरि ने गाजे बाजों के साथ हरिपदी गंगा में स्नान किया। महंत के साथ ही हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान वराह भगवान व गंगा मैया के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालु हर-हर गंगे के जयकारे हुए देर शाम तक गंगा स्नान करते रहे। वहीं मंदिरों पर देश दर्शन कर मनौतियां मांगी।
सिक्कों के रूप में लुटाया मंदिर का खजाना
गंगा स्नान के बाद वराह मंदिर के महंत विदेहानंद गिरि ने मंदिर के खजाने के रूप में सिक्कों को श्रद्धालुओं के बीच में लुटाया। जिन्हें पाने के लिए श्रद्धालुओं की होड़ लगी रही। मान्यता है कि इन सिक्कों को घर में व व्यापारिक प्रतिष्ठान में रखने से खुशहाली व समृद्धि आती है। इससे पूर्व सुबह वराह मंदिर प्रांगण में यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाली गईं। इस दौरान मंदिर सेवायत पं.नरेश त्रिगुणायत, रवि पाराशर, श्रीकांत तिवारी, सुनील तिवारी, हेमंत पंडित, केशव मिश्रा, प्रदीप भारद्वाज, विकास गुप्ता, राजू तिवारी, विकास पाठक, अभय शंकर स्थापक आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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