ताजमहल की संगमरमरी दीवारों को हरे रंग में रंगने वाले कीड़े ‘काइरोनोमस’ से निपटने का सॉल्यूशन एएसआई की रसायन शाखा ने तैयार कर लिया है। यमुना किनारे ताज की उत्तरी दीवार के लिए केमिकल सॉल्यूशन का प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा। रसायन शाखा ने एएसआई मुख्यालय से इस सॉल्यूशन को प्रयोग करने की अनुमति मांगी है।
20 अप्रैल को ताजमहल पर कीड़ों का हमला शुरू हुआ और तापमान बढ़ने के साथ काइरोनोमस फैमिली के कीड़ों गोल्डी, पोडीपोडीलम और ग्लिप्टोटेन का हमला तेज होता गया। एएसआई रसायन शाखा के अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डा. एमके भटनागर ने कीड़ों के सैंपल की देश के नामचीन संस्थानों से जांच कराई। इसमें पता चला कि यमुना में प्रदूषण के कारण कीड़े पनप रहे हैं। लेकिन एक महीने बाद भी यमुना की सफाई नहीं की गई। एएसआई रसायन शाखा ने खुद ही कीड़ों के हमले से ताज को बचाने की कवायद शुरू कर दी। डा. एमके भटनागर ने कीट विज्ञानियों से संपर्क के बाद कुछ सॉल्यूशन तैयार किए। से कीड़ों के हमले वाले स्थानों पर बड़ी ट्रे और कुछ बर्तनों में रखा गया। काइरोनोमस कीड़े संगमरमर की दीवार छोड़कर साल्यूशन की खुशबू से आकर्षित हुए और उस तक पहुंचते ही मर गए। मादा कीड़े सॉल्यूशन की ओर ज्यादा आकर्षित हुए। उनके पीछे हजारों की तादात में नर कीड़े हर ट्रे में मृत पाए गए। रसायन शाखा का प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा है।
हालांकि ताज पर इस सॉल्यूशन के हर दिन उपयोग के लिए एएसआई के दिल्ली मुख्यालय से अनुमति के लिए पत्र भेजा गया है। स्थानीय सर्किल अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यालय की अनुमति के बाद ही केमिकल का प्रयोग किया जाएगा। एएसआई के मुताबिक जब तक यमुना को प्रदूषण मुक्त करने और लार्वा वाली जगहों की सफाई नहीं की जाती, तब तक कीड़ों का हमला नहीं रुकेगा।
सोए प्रशासन को एनजीटी, मुख्यमंत्री भी न जगा पाए
आगरा। ताजमहल पर काइरोनोमस कीड़ों के असर से संगमरमरी दीवारें हरे रंग की हो रही हैं, इसकी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और प्रदेश के मुख्यमंत्री को तो चिंता है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ताज पर कीड़ों के हमले की गंभीर स्थिति पर भी एयरकंडीशन आफिस में चैन की बंशी बजा रहा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के दो दिन बाद भी प्रशासन के किसी अधिकारी ने एएसआई में कीड़ों के हमले से जुड़ी न तो कोई जानकारी ही साझा की और न ही ताजमहल के पीछे यमुना नदी में कीड़ों के पनपने वाली जगह की सफाई कराई।