हादसे के बाद मंदिर में उमड़ी भीड़ के दबाव को देखकर मंदिर प्रबंधन और पुलिस के हाथ-पैर फूल गए। निजी सिक्योरिटी गार्ड, कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों को भीड़ को काबू करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। किसी को भी एक स्थान पर जमा नहीं होने दिया गया।
वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में जन्माष्टमी की रात 1:55 बजे हुए हादसे के बाद भी मंदिर में भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को एकादशी के अवसर पर सुबह 7:45 बजे पर दर्शन खुलने से पूर्व ही मंदिर के अंदर और बाहर हजारों भक्त अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए पहुंचे। हादसे के बाद मंदिर में उमड़ी भीड़ के दबाव को देखकर मंदिर प्रबंधन और पुलिस के हाथ-पैर फूल गए। निजी सिक्योरिटी गार्ड, कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों को भीड़ को काबू करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। किसी को भी एक स्थान पर जमा नहीं होने दिया गया।
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बता दें ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में शुक्रवार देर रात मंगला आरती के समय भीड़ के दबाव के कारण दम घुटने से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि सात घायल श्रद्धालु घायल हो गए थे। इस मामले में जांच के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच कमेटी गठित की है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में हुआ हादसा कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी हादसे होते रहे हैं, लेकिन उन हादसों से कोई सबक नहीं लिया गया। मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर उमड़ी भीड़ के कारण हुए हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मंदिर के सेवायत आचार्य प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि वर्ष 1980 में बांकेबिहारी मंदिर में स्थानीय निवासी शिवचरण बूरे वालों की मृत्यु हुई थी।