बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि ग्रे हेरॉन के सिर पर मुकुट, गाल, ठुड्डी और गर्दन के किनारे सफेद होते हैं। चोंच लंबी नारंगी और पैर गुलाबी होते हैं। आंखों से पीछे तक चौड़ी काली पट्टी होती है।
आगरा के बाह में उफनाई चंबल नदी शांत होते ही शिकार की तलाश में भूरे बगुले निकल पड़े हैं। यूरोप, एशिया, अफ्रीका में पाए जाने वाले ग्रे हेरॉन (भूरे बगुले) का मछली, मेढ़क, सांप पकड़ने और उड़ान भरने का अंदाज लोगों को रोमांचित करता है। इनका वैज्ञानिक नाम अर्डिया सिनेरिया है।
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बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि ग्रे हेरॉन के सिर पर मुकुट, गाल, ठुड्डी और गर्दन के किनारे सफेद होते हैं। चोंच लंबी नारंगी और पैर गुलाबी होते हैं। आंखों से पीछे तक चौड़ी काली पट्टी होती है। पंख भूरे होते हैं, किनारा काला और निचला हिस्सा सफेद होता है। इनकी लंबाई करीब एक मीटर, वजन 1-1.50 किग्रा, पंख फैलाव 175-200 सेमी होता है। नर मादा के मुकाबले कुछ बडे़ होते हैं। ग्रे हेरॉन का जीवन 15-25 साल का होता है।
8 अंडे तक देती है मादा
अमूमन बसंत ऋतु में प्रजनन करते हैं। मादा 1 से 8 अंडे देती हैं। करीब 25 दिन तक नर-मादा दोनों अंडे सेते हैं। अंडों से निकले चूजे करीब 45 दिन में उड़ान भरने लगते हैं। ये कपनुमा घोंसला नदी किनारे के पेड़ों की टहनी पर बनाते हैं। नर सामान जुटाता है और मादा घोंसला बुनती है। छोटे तिनके, घास आदि का घोंसला बनाने में इस्तेमाल करते हैं।