कासगंज। जिले में हर साल करोड़ों रुपये की संपत्ति गर्मियों के मौसम में आग की भेंट चढ़ जाती है, मानव और पशुओं पर भी जान का खतरा मंडराता रहता है, लेकिन जिले का अग्निशमन विभाग संसाधनों और कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। शासन का ध्यान इस ओर नहीं है।
आग की घटनाएं तो जिले में वैसे वर्ष भर होती रहती हैं, लेकिन गर्मी के सीजन में इसमें काफी वृद्धि हो जाती है। खेतों में खड़ी फसलें आग की भेंट चढ़ जाती है। एक एक दिन में कई-कई घटनाएं होती है, जिससे जिला में उपलब्ध संसाधन काफी कम पड़ जाते हैं। जिले की तीन तहसीलों में मात्र दो फायर स्टेशन ही बने हुए हैं। सहावर तहसील में तो अभी तक फायर स्टेशन का निर्माण ही नहीं हो सका है। जिला काफी बढे़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिससे मात्र दो फायर स्टेशन के सहारे आग की घटनाओं पर नियंत्रण करने में विभाग के सामने वैसे ही काफी चुनौती रहती है। इस पर भी संसाधनों और कर्मियों की कमी से यह चुनौती और भी बढ़ जाती है, जिससे हर साल करोड़ों रुपये की संपत्ति आग की भेंट चढ़ जाती है। कई बार तो स्थिति ऐसी हो जाती है कि मानव एवं पशुओं तक की जान आग में चली जाती है।
पद और संसाधन उपलब्धता रिक्त
सीएफओ 1 1 0
अग्निशमन अधिकारी 2 0 2
अग्निशमन अधिकारी द्वितीय 2 1 1
फायर मैन 42 31 11
फालवर 4 2 2
सफाई कर्मी 2 1 1
स्टेनों 2 0 2
फायर गाड़ियां 4 4 0
जीपें 4 1 3
जिले में आग की घटनाएं एक नजर में
2019 2020 2021
आग की घटनाएं 187 163 186
जोखिम संपत्ति 4.43 करोड़ 6.05 करोड़ 3.99 करोड़
नष्ट हुई संपत्ति 1.99 करोड़ 2.34 करोड़ 1.09 करोड़
मानव मौत 2 0 0
मानव झुलसे 6 0 0
पशु मौत 6 1 13
पशु झुलसे 6 1 6
हाईडेंट प्वाइंट की कमी भी आती है आड़े
कासगंज। आग की घटनाओं के दौरान हाईडेंट प्वाइंट की कमी भी आड़े आती है। शहर में कोई भी हाईडेंट प्वाइंट नहीं है। जहां से जरूरत पड़ने पर दमकल गाड़ियों में पानी को भरा जा सके। मात्र फायर स्टेशन एवं प्रभुपार्क में ही हाईडेंट प्वाइंट है। यही स्थित पटियाली की है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी आग बुझाते समय कर्मियों को पानी की कमी से जूझना पड़ता है। ग्रामीणों के पंप चलवाकर विभाग को पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
जिले में आग की घटनाओं से होने वाली क्षाति को रोकने के लिए विभाग कम संसाधनों के बावजूद पूरा प्रयास करता है। प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की संपत्ति एवं जन हानि होने से बचाता है। - आनंद सिंह राजपूत, मुख्य अग्निशमन अधिकारी