शहर में जहां एक ओर पेयजल समस्या विकराल रूप ले चुकी है वहीं दूसरी तरफ आईपीएच और नप की लापरवाही के चलते कई लीटर पानी सड़क पर बर्बाद बह रहा है
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भीषण गर्मी में जल संकट की वजह से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने लगी है। एक-एक बाल्टी पानी को तरस रहे लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है। ये स्थिति पहले से तैयारियों के अभाव में खड़ी हो रही है। मरम्मत से लेकर रॉ वाटर स्टोरेज की पहले से कोई व्यवस्था नहीं की गई। इतना ही नहीं यमुना में पानी की कमी को दूर करने के लिए भी उच्च स्तर पर कोई योजना नहीं बनी। इस लापरवाही का परिणाम सभी के सामने है। पानी के लिए आए दिन शहर के किसी न किसी हिस्से में लोग कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं।
वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो जल संस्थान जीवनी मंडी और सिकंदरा वाटर वर्क्स से शहर में पानी सप्लाई करता है। मगर, विभाग के दोनों ही वाटर वर्क्स अपनी क्षमता जितना भी पानी नहीं सप्लाई कर पा रहे। स्थिति यह है कि जीवनी मंडी 260 एमएलडी पानी प्रतिदिन सप्लाई के सापेक्ष में बमुश्किल 120 एमएलडी ही पानी दे पा रहा है। वहीं, सिकंदरा वाटर वर्क्स 144 एमएलडी के सापेक्ष अधिक से अधिक सौ एमएलडी पानी ही दे रहा है। जबकि शहर में इससे चार गुने अधिक पानी की प्रतिदिन आवश्यकता है। भीषण गर्मी में पानी की समस्या की स्थिति को भांपते हुए भी दोनों वाटर वर्क्स पर ध्यान नहीं दिया गया। न ही जर्जर हो चुके पाइपों की मरम्मत की गई। इसकी वजह से आए दिन या तो पाइप लाइन लीक हो जाती है या फिर वाटर वर्क्स ठप हो जाता है। भुगतना शहरवासियों को पड़ता है।
नहीं बढ़ा यमुना में पानी
पूर्व अनुभव को दरकिनार करते हुए भी यमुना के जल स्तर सुधार के कोई प्रयास नहीं किए गए। स्थिति यह है कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार गर्मियों में गोकुल बैराज से आगरा को काफी कम पानी मिल रहा है। पिछले साल जहां 1100 क्यूसिक प्रतिदिन पानी मिल रहा था वहीं, इस बार 900 क्यूसिक पानी प्रतिदिन मिल रहा है। इसकी वजह से दोनों वाटर वर्क्स के सामने रॉ वाटर का संकट खड़ा हो रहा है।
निजी हाथों में देने के कारण शहर में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। अधिकारियों ने अधिकांश काम ठेके पर कराना शुरू कर दिया है, इसकी वजह से कार्य में गुणवत्ता नहीं आ रही। कभी पाइप लाइन लीक हो जाती है तो कभी मशीनें ठप हो जाती हैं।
- डीके जोशी, सदस्य, सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी