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साइबर ठग: कौन है मोनिका, जिसके पास है बैंकों के सात लाख ग्राहकों का डाटा, तलाश में जुटी पुलिस

Thu, 28 Jan 2021 01:57 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • आगरा पुलिस और नोएडा एसटीएफ ने साइबर ठगों के ऐसे गिरोह को पकड़ा है, जो 300 लोगों से एक करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। आरोपियों ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 
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विस्तार
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पुलिस ने साइबर ठग गिरोह के सरगना समेत चार शातिरों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह में एक युवती भी शामिल है, जो फरार है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि फरार युवती आरोपियों को बैंक के ग्राहकों का डाटा बेचती थी। उसके पास बैंकों के करीब सात ग्राहकों को डाटा है। पुलिस उसके बारे में पता कर रही है। 

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मंगलवार को फरीदाबाद से पकड़े गए आरोपियों में सौरभ भारद्वाज, आस मोहम्मद उर्फ आशु, लखन गुप्ता उर्फ गोलू और शिवम गुप्ता हैं। गैंग के सरगना सौरभ और आस मोहम्मद हैं। पुलिस ने इनके पास से एक लैपटॉप, एक स्कॉर्पियो, एक होंडा सिटी कार, 6.59 लाख रुपये नगद और 15 डायरियां बरामद की हैं। डायरियों में 6000 से ज्यादा लोगों के क्रेडिट कार्ड का डाटा है। 
संबंधित खबर- आगरा: क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल कर 300 लोगों से एक करोड़ की ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार
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एसटीएफ और पुलिस की पूछताछ में सौरभ ने बताया कि उसे कॉल सेंटर की पूर्व कर्मचारी मोनिका विभिन्न कंपनियों के क्रेडिट कार्डधारकों का डाटा निकालकर देती थी। मोनिका जिन कॉल सेंटर में काम करती थी, उनमें कई बैंकों की ओर से सेवा प्रदान की जाती थी। छह महीने पहले उसने कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ दी। उसने ठग गिरोह के साथ काम शुरू कर दिया। 

आरोपियों के अनुसार मोनिका के पास अलग-अलग बैंकों के सात लाख ग्राहकों का डाटा है। वह अभी फरार है। मोनिका इस डाटा को बेचने के लिए कई और गैंग से संपर्क भी कर रही है। मोनिका को सौरभ एक डाटा के बदले 35 रुपये देता था। मोनिका के पास जो डाटा है, उसमें यह जानकारी होती थी कि कार्ड की कितनी लिमिट है। कब बनकर आने वाला है।

धोखाधड़ी की रकम से खरीदे मकान और लग्जरी कार
पुलिस के अनुसार बैंकों के ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड का डाटा प्राप्त कर एक करोड़ से अधिक की ठगी करने वाला गैंग दिल्ली एनसीआर में सक्रिय था। गैंग के सरगना सौरभ ने ठगी की रकम से एक मकान खरीद लिया, जबकि दो लग्जरी कार भी खरीदीं। वहीं सैलून पर काम करने वाले आस मोहम्मद उर्फ आशु ने भी काफी रकम इकट्ठा कर ली।

आस मोहम्मद उर्फ आशु बीए पास है। वर्ष 2012 में दिल्ली गया था। 2014 तक एक सैलून में काम किया। इसके बाद ओखला दिल्ली में एक कॉल सेंटर में कार्य करने लगा। यहां पर सौरभ भारद्वाज और मोनिका भारद्वाज से मुलाकात हुई। कॉल सेंटर में ही अजीत पाल नामक एक युवक काम करता था।
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अजीत ने सिखाया था ठगी का तरीका
अजीत ने ही क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर रकम निकालने का तरीका सिखाया। बैंक जिन कंपनियों से कार्ड ग्राहकों के पास तक पहुंचाते हैं, उनसे डाटा खरीदा गया। उससे सौरभ और आस मोहम्मद ने विभिन्न बैंकों के क्रेडिट कार्ड के डाटा लेना शुरू कर दिया। वर्ष 2017 से सौरभ भारद्वाज और आशु ने अपना अलग काम शुरू कर दिया। ई कामर्स की मर्चेंडाइज साइट बना ली। इनके बैंक खाते भी खोल लिए।

शिवम और लखन करते थे कॉल
आस मोहम्मद ने लोगों को कॉल करने के लिए बेरोजगार युवकों को फंसाना शुरू कर दिया। उसने अपने पड़ोसी लखन गुप्ता और शिवम को इस काम में लगा लिया। ये दोनों आस और सौरभ से डाटा मिलने के बाद लोगों को कॉल करते थे। उन्हें बैंक के क्रेडिट कार्ड के फायदे बताते थे। सौरभ ने इंडिया शापी लाइट और शिव एंटरप्राइजेज नाम से दो ई-कामर्स साइट और बनाईं।

खेरागढ़ के गजेंद्र की निकाली थी रकम
खेरागढ़ के भिलावली निवासी गजेंद्र सिंह ने पुलिस से शिकायत की थी। उसने बताया कि कसबा स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से गौरव नाम के व्यक्ति ने कॉल किया। कहा कि आप का क्रेडिट कार्ड बन जाएगा। बैंक बुलाया। बैंक में सभी प्रक्रिया पूरी करा ली। यह भी बताया कि अब सत्यापन के लिए कॉल आएगा। 

तीन नवंबर 2020 को क्रेडिट कार्ड के पहुंचने से पहले 20589 की शापिंग करके ठगी कर ली गई। 19 दिसंबर 2020 को बैंक जाने पर रकम निकलने का पता चला। इस पर खेरागढ़ थाना में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद पुलिस ने जांच की। तब जाकर यह गिरोह पकड़ा गया। 
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