आरोपियों के अनुसार मोनिका के पास अलग-अलग बैंकों के सात लाख ग्राहकों का डाटा है। वह अभी फरार है। मोनिका इस डाटा को बेचने के लिए कई और गैंग से संपर्क भी कर रही है। मोनिका को सौरभ एक डाटा के बदले 35 रुपये देता था। मोनिका के पास जो डाटा है, उसमें यह जानकारी होती थी कि कार्ड की कितनी लिमिट है। कब बनकर आने वाला है।
धोखाधड़ी की रकम से खरीदे मकान और लग्जरी कार
पुलिस के अनुसार बैंकों के ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड का डाटा प्राप्त कर एक करोड़ से अधिक की ठगी करने वाला गैंग दिल्ली एनसीआर में सक्रिय था। गैंग के सरगना सौरभ ने ठगी की रकम से एक मकान खरीद लिया, जबकि दो लग्जरी कार भी खरीदीं। वहीं सैलून पर काम करने वाले आस मोहम्मद उर्फ आशु ने भी काफी रकम इकट्ठा कर ली।
आस मोहम्मद उर्फ आशु बीए पास है। वर्ष 2012 में दिल्ली गया था। 2014 तक एक सैलून में काम किया। इसके बाद ओखला दिल्ली में एक कॉल सेंटर में कार्य करने लगा। यहां पर सौरभ भारद्वाज और मोनिका भारद्वाज से मुलाकात हुई। कॉल सेंटर में ही अजीत पाल नामक एक युवक काम करता था।
अजीत ने सिखाया था ठगी का तरीका
अजीत ने ही क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर रकम निकालने का तरीका सिखाया। बैंक जिन कंपनियों से कार्ड ग्राहकों के पास तक पहुंचाते हैं, उनसे डाटा खरीदा गया। उससे सौरभ और आस मोहम्मद ने विभिन्न बैंकों के क्रेडिट कार्ड के डाटा लेना शुरू कर दिया। वर्ष 2017 से सौरभ भारद्वाज और आशु ने अपना अलग काम शुरू कर दिया। ई कामर्स की मर्चेंडाइज साइट बना ली। इनके बैंक खाते भी खोल लिए।
शिवम और लखन करते थे कॉल
आस मोहम्मद ने लोगों को कॉल करने के लिए बेरोजगार युवकों को फंसाना शुरू कर दिया। उसने अपने पड़ोसी लखन गुप्ता और शिवम को इस काम में लगा लिया। ये दोनों आस और सौरभ से डाटा मिलने के बाद लोगों को कॉल करते थे। उन्हें बैंक के क्रेडिट कार्ड के फायदे बताते थे। सौरभ ने इंडिया शापी लाइट और शिव एंटरप्राइजेज नाम से दो ई-कामर्स साइट और बनाईं।
खेरागढ़ के गजेंद्र की निकाली थी रकम
खेरागढ़ के भिलावली निवासी गजेंद्र सिंह ने पुलिस से शिकायत की थी। उसने बताया कि कसबा स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से गौरव नाम के व्यक्ति ने कॉल किया। कहा कि आप का क्रेडिट कार्ड बन जाएगा। बैंक बुलाया। बैंक में सभी प्रक्रिया पूरी करा ली। यह भी बताया कि अब सत्यापन के लिए कॉल आएगा।
तीन नवंबर 2020 को क्रेडिट कार्ड के पहुंचने से पहले 20589 की शापिंग करके ठगी कर ली गई। 19 दिसंबर 2020 को बैंक जाने पर रकम निकलने का पता चला। इस पर खेरागढ़ थाना में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद पुलिस ने जांच की। तब जाकर यह गिरोह पकड़ा गया।