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अब जांच के घेरे में पूरी यूनिवर्सिटी

Mon, 14 Dec 2015 01:56 AM IST
चंद्र मोहन शर्मा
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डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच का दायरा बढ़ने जा रहा है। अभी तक सिर्फ बीएड की जांच चल रही है। वो भी केवल 2004 से 2009 तक के सत्रों की। लेकिन अब एसआईटी ने सभी पाठ्यक्रमों को जांच के घेरे में लेने की तैयारी कर ली है। उच्च न्यायालय से अनुमति मिलते ही 1999 से 2014 तक के सत्रों की फाइलें खंगालने का काम शुरू कर दिया जाएगा। यह नौबत इसलिए आई है क्योंकि जांच एजेंसी कोबीएड की तरह सभी फैकल्टी से जाली मार्कशीट जारी किए जाने का शक है।
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अभी तक की जांच में एसआईटी को बीएड की 25,000 जाली मार्कशीट मिल चुकी हैं। यह भी पता चल चुका है कि बेसिक शिक्षा विभाग में 4,500 सहायक अध्यापकों की बीएड डिग्री फर्जी है। इनमें से 497 को नोटिस जारी कर पूछताछ शुरू हुई तो पता चला कि सिर्फ बीएड की नहीं, लगभग सभी पाठ्यक्रमों की फर्जी डिग्री बेची गई हैं। अभी तक जांच के दायरे में 83 निजी कॉलेज हैं। लेकिन अब तैयारी यूनिवर्सिटी से संबद्ध सभी 770 कॉलेजों की जांच की है।
इसी बीच यह खुलासा भी हुआ कि एमबीए, बीटेक, बीई, एमसीए , बीएससी इन कंप्यूटर साइंस की डिग्री फर्जी पाई हैं। इनके जरिए कई युवाओं ने विदेशों में नौैकरी हासिल कर लीं। ये डिग्रियां सत्यापन के लिए यूनिवर्सिटी आई थीं।
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एसआईटी जांच में पाया गया कि बीएड की जाली डिग्री 2004 से नहीं, 1999 से ही बनाई जा रही थीं। यूनिवर्सिटी से रिकार्ड मांगा तो जवाब मिला कि 2004 से लेकर 2014 तक का डाटा गायब हो गया है। दो दिन पहले ही खुलासा हुआ कि 2014 के सत्र में 6000 फर्जी छात्रों को परीक्षा में बैठाया गया।
केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तमाम तथ्यों के मद्देनजर एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया। इसके लिए अब सिर्फ हाईकोर्ट से अनुमति मिलने का इंतजार है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस कोर्ट में चल रही है। अभी तक सात एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। छह आगरा पुलिस ने और एक एसआईटी ने दर्ज की। उधर, जांच का दायरा बढ़ने पर एसआईटी को और मजबूत किया जा सकता है। अभी 55 अधिकारी जांच में लगे हैं। इनकी संख्या बढ़ सकती है।
जाली डिग्री से सिपाही न हो जाएं भर्ती
प्रदेश में सिपाही भर्ती की प्रक्रिया बदल दी गई है। पहले लिखित परीक्षा होती थी, लेकिन अब यह नहीं है। अब फिजिकल के अलावा सिर्फ दसवीं और बारहवीं की मार्कशीट की भूमिका रह गई है। ऐसे में इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जाली मार्कशीट का इस्तेमाल सिपाही भर्ती में किया जा सकता है। एसआईटी की जांच में दसवीं और बारहवीं की मार्कशीट भी फर्जी मिल चुकी हैं। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में सेटिंग करके इनका फर्जी सत्यापन भी करा लिया गया था।
पूरे प्रदेश में शुरू हो चुकी है जांच
बीएड की जाली मार्कशीट के इस प्रकरण ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा रखा है। एसआईटी ने बेसिक शिक्षा विभाग को 25 हजार जाली मार्कशीट का ब्योरा दे दिया है। इसके बाद सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी सहायक अध्यापकों की डिग्रियों का नए सिरे से सत्यापन करा रहे हैं। देखा जा रहा है कि एसआईटी से मिले रोल नंबर की कितनी डिग्री हैं। अभी तक जाली डिग्री वाले सैकड़ों शिक्षक प्रकाश में आ चुके हैं। इन्हें बर्खास्त कर इन पर केस दर्ज कराए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
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