भरतपुर हाउस गोलीकांड के सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि संजीव रस्तोगी के हाथ में नजर आ रहे चार कागजों में बड़ा राज छिपा है। उन्हाेेंने दो गोलियां लगने के बाद भी इन कागजों को नहीं छोड़ा। पुलिस इन्हें बरामद भी नहीं कर पाई है। ये कागज स्टांप पेपर माने जा रहे हैं। शक यह भी है कि इन पर संजीव ने राजकुमार से कुछ लिखवा लिया था।
राजकुमार का एक मोबाइल फोन भी गायब है। माना जा रहा है कि इसे भी संजीव उठाकर ले गए थे। इसमें भी करोड़ों के लेन-देन की बातें रिकार्ड बताई जा रही हैं। राजकुमार के नजदीकी लोगों का कहना है कि संजीव ने ही राजकुमार को वायदा के अवैध कारोबार में लगाया था। इसमें राजकुमार को लगातार घाटा हो रहा था। संजीव इसका फायदा उठा रहे थे। वह राजकुमार के साथ प्रापर्टी में भी पैसा लगा रहे थे।
घाटा होने पर राजकुमार के प्लाट बिकवा रहे थे। छह प्लॉट और एक फार्म हाउस बिक वा चुके थे। अब संजीव की नजर राजकुमार की कोठी पर थी। माना जा रहा है कि स्टांप पेपर पर कोठी ही अपने नाम लिखवा ली थी। संजीव का परिवार इस बारे में कुछ बताने को तैयार नहीं है। पुलिस ने उनके बेटे सनी से पूछा तो उसने कहा कि उसे कुछ पता नहीं। उधर, राजकुमार के भाई सुंदर लालवानी का कहना है कि संजीव ने कागजों में उनके भाई से कुछ ऐसा लिखवा लिया था जो इस वारदात की वजह बना। इंस्पेक्टर हरीपर्वत ने बताया कि संजीव का परिवार उन कागजों और मोबाइल फोन के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा है।
‘डिब्बा’ में बंद है कारोबारियों का सुकून
चंद दिनों में करोड़ों के वारे-न्यारे करने की चाहत में शहर के व्यापारी डिब्बा कारोबार के फंदे में फंसते जा रहे हैं। भरतपुर हाउस गोलीकांड के बाद शहर के व्यापारियों ने वायदा कारोबार को बंद कराने की मांग तो उठाई है, लेकिन यह कारोबार देन भी तो इन्हीं की है।
हींग की मंडी में जिस तरह से पर्ची सिस्टम चलता है, ठीक वैसे ही व्यापारियों ने डिब्बा कारोबार को एमसीएक्स के समानांतर खड़ा कर दिया। एमसीएक्स के वायदा कारोबार के लिए तो व्यापारी को एकाउंट, मार्जिन मनी, पहचान पत्र, केवाईसी और टैक्स देने होते हैं, लेकिन डिब्बा कारोबार में इन सबसे बचते हुए करोड़ों का लेन-देन एक झटके में ही हो जाता है। सोने और चांदी जैसी धातुओं पर ही डिब्बे का कारोबार सबसे ज्यादा है। हैरत की बात ये है कि खरीद बिक्री के रेट तो एमसीएक्स के माने जाते हैं, लेकिन बाकी नियम-कायदे डिब्बे कारोबार की गद्दियों ने खुद ही बनाए हुए हैं। आपसी विश्वास पर पर्चियों के जरिए वायदा की बुकिंग होती है। एमसीएक्स की तरह यहां न तो लिमिट है और न ही कोई टर्मिनल। भविष्य के सौदों पर व्यापारी इसी लालच में सब कुछ दांव पर लगाए चले जाते हैं। हर बार कुछ खोने के बाद पाने की उम्मीद में वह डिब्बा कारोबार में फंसते रहते हैं। सीताराम कालोनी का मामला हो या आवास विकास कालोनी का या फिर कमला नगर और अब भरतपुर हाउस का मामला। डिब्बा कारोबार शहर में दो दर्जन से ज्यादा बड़े व्यापारियों के बीच झगड़े की वजह बन चुका है।
बंद हो वायदा और डिब्बा कारोबार
आगरा। आगरा मंडल व्यापार संगठन संस्थापक अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल और महामंत्री हरेश अग्रवाल ने कहा कि वायदा कारोबार अब खतरनाक बन चुका है। बड़े उतार-चढ़ाव से कारोबारी पल भर में ही कंगाल हो रहे हैं। कई व्यापारी आत्महत्या पर विवश हुए तो कई की हत्या हो चुकी है। व्यापार संगठन अध्यक्ष और भरतपुर हाउस वेलफेयर सोसायटी अध्यक्ष चरनजीत थापर ने लाटरी की तरह वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है, ताकि कई परिवार बर्बाद होने से बच सकें।