राहे आला हजरत गेट बनाए जाने पर शहर में दो वर्गों में विवाद के बाद प्रशासन ने बैठक बुला कर हल ढूंढने का प्रयास किया लेकिन लंबी वार्ता के बाद भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पायी। कलेक्ट्रेट में बैठक के दौरान सपा के पार्षदों ने भी गेट के विरोध पर एतराज किया। उधर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों का कड़ा रुख देखते हुए शिवसेना के नेताओं समेत दूसरे पक्ष के लोग बैठक का बहिष्कार करके चले गए। एहतियातन मौके पर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। रामपुर रोड बाकरगंज क्रासिंग के सामने जवाहर पैलेस से बराबर से टक्कर वाली पुलिया से दरगाह आला हजरत की तरफ जाने वाले रास्ते पर नगर निगम ने तीन जनवरी को पार्षद रूबी सलीम के प्रस्ताव पर राहे आला हजरत(दरगाह आला हजरत जाने वाला रास्ता) के नाम से गेट बनाने को मंजूरी दी थी। मंगलवार को गेट का काम शुरू हुआ तो गली में रहने वाले दूसरे पक्ष के लोगों ने गड्ढे पाट दिए। इसे लेकर आला हजरत दरगाह से जुड़े लोग मौके पर पहुंच गए। तनाव को देखते हुए पुलिस ने काम रुकवाकर आला अधिकारियों को बता दिया।
बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में दोनों पक्षों के लोगों को बुलाकर गेट बनाए जाने के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश की गई। एडीएम सिटी आलोक कुमार सिंह और एसपी सिटी की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई। विरोध करने वालों में मनोज सक्सेना का कहना था कि राहे आला हजरत गेट बनाना गलत है। गेट बनना ही है तो किसी शहीद के नाम से बना दिया जाए। इस पर अफसरों ने कहा कि नगर निगम ने गेट को मंजूरी दी है। शहर में और भी तमाम महापुरुषों के नाम के गेट बनाए जा रहे हैं। इसलिए आला हजरत के नाम के गेट बनाए जाने का विरोध उचित नहीं है। वह भी देश के बड़े महापुरुष हैं। नगर निगम बोर्ड में प्रस्ताव स्वीकृत होते समय विरोध होना चाहिए था। गेट का निर्माण रुकवाना है तो आप कोर्ट चले जाइए। मनोज ने कहा कि गेट बना तो कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। इस पर अफसरों ने दो टूक कह दिया कि इससे निपटा जाएगा। इस पर मनोज सक्सेना के साथ उनके पक्ष के लोग बैठक का बहिष्कार करके चले गए। बैठक में दरगाह आला हजरत से जुड़े सलमान मियां, नासिर कु रैशी, खलील कादरी, अकलीम बेग, ताज खां आदि मौजूद थे।
शहर में 150 गेट प्रस्तावित हैं
बैठक में आला हजरत गेट बनाए जाने के पक्ष में सपा के पार्षद दल के नेता राजेश अग्रवाल के अलावा पार्षद रूबी सलीम, शमीम अहमद, अच्छे मियां मौजूद थे। उनका कहना था कि शहर में करीब 150 गेट महापुरुषों के नाम से प्रस्तावित हैं। राहे आला हजरत गेट का विरोध होगा तो शहर में बाकी गेट किस तरह से बन पाएंगे।