नीम-हकीम खतरा ए जान तो आपने खूब सुना होगा, लेकिन अब यह भी जान लीजिए कि फेसबुक पर रोजाना तंदरुस्ती के नए नए नुस्खे पेश करने वाले हाइटेक हकीमों से भी खतरा कम नहीं है। दरअसल, इनमें से कई हकीम नहीं, बल्कि साइबर अपराधी हैं, जिनकी नजर आपके बैंक एकाउंट पर लगी है। इनके निशाने पर खासतौर से महिलाएं रहती हैं। ऐसे कई मामले सामने भी आ चुके हैं।
पुलिस लाइन में शुक्रवार को साइबर क्राइम पर आगरा जोन की दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। इसे नाम दिया गया है साइबर क्राइम, साइबर फोेरेंसिक्स एंड साइबर लॉ टू इंश्योर साइबर सिक्योरिटी। इसमें सेंटर फोर रिसर्च आन साइबर क्राइम एंड साइबर लॉ ( सीसी एंड सीएल ) और कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) के एक्सपर्ट ने पुलिस अफसरों को जानकारी दी। उन्हें साइबर अपराधियों के नए नए फंडे बताए गए।
इनसे निपटने की तरकीब समझाई गई। साइबर अपराध में फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य जुटाने केतरीकों पर रोशनी डाली गई। सीसी एंड सीएस और सीएसआई केचेयरमैन अनुज अग्रवाल ने बताया कि फेसबुक पर कई लोग आयुर्वेद के उपचार शेयर करते रहते हैं। इनमें से कई फ्रॉड होते हैं। जो फेसबुक यूजर उनके झांसे में आ जाते हैं, उनसे उनकी बीमारी जानकर पहले उपचार के नाम पर ठगी करते हैं और फिर ब्लैकमेल पर उतर आते हैं।
इसी तरह ज्योतिष के नाम पर चमत्कार के दावे करके ठगी की जा रही है। ऐसे फ्रॉड बड़ी चालाकी से फेसबुक यूजर को फंसाते हैं और फिर उनसे उनका व्हाट्स एप नंबर हासिल करते हैं। इसके बाद हैकिंग के जरिए मोबाइल से डाटा हैक कर लेते हैं। अगर मोबाइल में बैंक एकाउंट, एटीएम पास वर्ड सेव हो तो उससे फ्रॉड कर चूना लगा देते हैं।
सावधानी में ही सुरक्षा
:: ई-मेल और फोन पर बैंक एकाउंट, पास वर्ड, एटीएम कार्ड नंबर जैसी कोई जानकारी न दें।
:: फोन पर कोई एटीएम या एकाउंट संबंधी जानकारी मांगे, तो समझ लीजिए, वह ठग है।
:: फेसबुक पर अश्लील लिंक नजर आए, तो भूल से भी उसे क्लिक न करें।
:: आईडी के रूप में कभी भी पेन कार्ड न दें, वोटर आईडी, डीएल वगैरह का इस्तेमाल करें।
:: फर्जी ई-मेल पहचानना मुश्किल नहीं, इसमें नीचे दिया लिंक देखें, असली से स्पेलिंग अलग होगी।
नंबर पाकिस्तानी, कॉल फ्रॉड की
वर्कशॉप में बताया गया कि प्लस 92 ( पाकिस्तान के आईएसडी कोड) से आ रही मिस्ड कॉल के पीछे भी साइबर अपराधी हैं। ऐसी कॉल वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल ( वीओआईपी) के माध्यम से की जाती हैं। इसमें कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर जो नंबर डायल किया जाता है, वही रिसीव करने वाले को नजर आता है।
200 प्रतिशत की दर से वृद्धि
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध में पिछले तीन सालों में 200 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है। इनमें पहले नंबर पर ऑन लाइन शॉपिंग के जरिए फ्रॉड है। दूसरे पर एटीएम के जरिए। और तीसरे पर हैकिंग के माध्यम से।
वर्जन
-- साइबर अपराधी नई नई ट्रिक सीख रहे हैं, इसलिए पुलिस का अपडेट होते रहना जरूरी है, वर्कशाप से इसमें बड़ी मदद मिलेगी - अजय मोहन शर्मा ( डीआईजी )
-- वर्कशॉप में पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली हैं। इनसे साइबर अपराधियों को पकड़ने और सजा दिलाने में आसानी होगी - डा. प्रीतिंदर सिंह ( एसएसपी )