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पुलिस बर्बरता पर फूटा पब्लिक का गुस्सा

Mon, 19 Sep 2016 01:17 AM IST
पुलिस बर्बरता पर फूटा पब्लिक का गुस्सा
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पुलिस बर्बरता पर फूटा पब्लिक का गुस्सा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 भूरी सिंह को पुुलिस ने धक्का दिया या वह पुलिस से डरकर तालाब में कूदा, दोनों सूरत में उसकी मौत के लिए पुलिस ही जिम्मेदार है। दरअसल, पुलिस ने उसे बचाने की कोशिश ही नहीं की। वह जब तालाब में डूब रहा था, तब गोताखोर नहीं बुलाए गए। वह जब डूब गया, तो पुलिस वहां से भाग गई। इसकी जानकारी पुलिस के अलावा सिर्फ  भूरी सिंह के भतीजे रवि को थी। अगर पुलिस उसे छोड़ देती तो शायद वह किसी तरह भूरी को बचा लेता।
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बता दें, न रवि पर कोई केस है और भूरी पर था। दोनों के खिलाफ  कभी एनसीआर तक दर्ज नहीं की गई। इसके बावजूद पुलिस ने उनसे अपराधियों जैसा सुलूक किया। इरादतनगर पुलिस जिस देवकीनंदन की तलाश में आई थी, उसकी लोकेशन भी शमसाबाद की नहीं थी। इसके बावजूद दबिश में पूरी ताकत लगाई गई। चश्मदीदों ने बताया कि जब पुलिस ने रवि को जीप में बैठा लिया, तो परिवार की महिलाओं ने विरोध किया। आरोप है कि पुलिस ने उनकी पिटाई कर दी। महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। पुलिस की तमाम बर्बरता का पता तब चला जब भूरी सिंह के परिवार के लोग थाना पहुंचे। वहां रवि बंद था। उसे छोड़ा गया तो उसने बताया कि भूरी सिंह को पुलिस ने तालाब में फेंका है। लोगों ने पुलिस से गोताखोर बुलाने के लिए कहा लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। तब गांव के एक गोताखोर ने तालाब में डुबकी लगाई और भूरी सिंह का शव बाहर निकला। शव देखते ही गांव के लोग भड़क गए। जाम लगा दिया। पुलिस पर पथराव कर दिया। अधिकारियों की गाड़ियों के शीशे पथराव में टूट गए। उधर, लोगों को समझाने के लिए पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह, सपा नेता हरेंद्र सिंह, पिंटू यादव, बसपा नेता उमेश सैथिया मौके पर पहुंचे।

अफवाह ने आग में घी डाला
शमसाबाद। जब लोग भूरी सिंह का शव सड़क पर रखकर जाम लगाने जा रहे थे, तभी यह अफवाह फैल गई कि उसके सिर में गोली लगी है। एक युवक ने जोर से कहा कि कान के पास से खून बह रहा है। यह सुनते ही भीड़  उग्र हो गई।
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पुलिस पर हमला करने वालों की तलाश शुरू
शमसाबाद। पुलिस पर पथराव करने वालों पर सख्ती की तैयारी है। एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह के निर्देश पर पुलिस ने बलवा, जानलेवा हमला जैसी संगीन धाराओं में केस दर्ज किया है। रात में ही आरोपियों की तलाश में घरों में दबिश दी गई। पथराव में कई सिपाही घायल हुए। सिपाही संतोष को सिर में पत्थर लगा। पुलिस ने पथराव की वीडियोग्राफी भी कराई है। इसकी रिकार्डिंग देखी जा रही है। इसमें कई चेहरे साफ नजर आ रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कई लोगों की पहचान हो गई है। सोमवार को ही उनकी गिरफ्तारी की जा सकती है।

पहले भी लगे हैं पुलिस के दामन पर खून के छींटे
आगरा। यह पहला मौका नहीं है जब पुलिस दबिश के नाम पर ज्यादती करने के आरोप में फंसी हो। इससे पहले एत्मादपुर में एक युवक की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। तब भी रात भर बवाल हुआ था। हत्या का केस दर्ज किया गया लेकिन बाद में मामला रफा दफा कर दिया गया। मानवाधिकार आयोग में पिछले दो महीनों में 16 शिकायतें जनपद पुलिस की अवैध दबिश की गई हैं। ऐसे लोगों को परेशान किया जाता है जिनका अपराध से वास्ता न हो।
इसके लिए थाना पुलिस अफसरों की अनुमति भी नहीं लेती। तीन महीने पहले की बात है। हरीपर्वत और एत्माद्दौला पुलिस टेढ़ी बगिया पर दबिश देने पहुंच गई थी। यहां बदमाशों से मुठभेड़ हो गई। एक सिपाही घायल हो गया था। तब खुलासा हुआ था कि थानों ने अपनी अपनी एसओजी बना रखी है। ऐसी एसओजी का मकसद दबिश कम और वसूली ज्यादा होती है। कई मामले सामने आ चुके हैं।
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