विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा और आगामी रणनीति को लेकर बुलाई गई सपा महानगर की बैठक में कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। हार का ठीकरा सरकार में मंत्री रहे नेताओं पर फोड़ते हुए जमकर हंगामा किया। आरोप-प्रत्यारोप के बीच कार्यकर्ताओं में मारपीट की नौबत आ गई। स्थिति बिगड़ती देख बैठक निरस्त करनी पड़ी। बैठक में कई पूर्व मंत्रियों के साथ-साथ जिला प्रभारी विपुल पुरोहित तक नहीं पहुंचे।
रविवार को फतेहाबाद स्थित पार्टी कार्यालय पर सुबह दस बजे से बैठक बुलाई गई थी। इसमें कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हो गया। दरअसल, महानगर अध्यक्ष रईसउद्दीन दोपहर 12 बजे के आसपास बैठक में पहुंचे। इस पर कुछ कार्यकर्ताओं ने टिप्पणी कर दी। एक कार्यकर्ता न तो यहां तक कह दिया कि बैठक में 80 फीसदी चापलूस बैठे हैं। इस पर कार्यकर्ताओं का एक गुट भड़क गया। दोनों गुटों में मारपीट की नौबत आ गई। एक-दूसरे से खींचतान कर दी। सरकार में मंत्री रहे कई नेताओं के बैठक में न पहुंचने पर भी कार्यकर्ताओं ने भड़ास निकाली। कहा कि सत्ता में रहते हुए मंत्रियों ने कार्यकर्ताओं से सीधे मुंह बात तक नहीं की। जिले को तमाम लाल बत्ती दी गईं लेकिन एक न काम आई। जबकि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई। दर्जा प्राप्त मंत्री अभिनव शर्मा के अलावा कोई और पूर्व मंत्री हार की समीक्षा में शामिल नहीं हुआ। बड़ी मुश्किल से मामला शांत किया। इससे पहले बैठक में मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने कहा कि जिले को तमाम लाल बत्ती मिली लेकिन एक भी मुस्लिम समाज के नेता को मंत्री का दर्जा नहीं दिया गया। जबकि 90 फीसदी मुस्लिम सपा को वोट देता है। महानगर अध्यक्ष रईसउद्दीन का कहना है कि बैठक में कोई हंगामा नहीं हुआ। हमने सिर्फ पदाधिकारियों को बुलाया था। मगर, बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंच गए, इस वजह से थोड़ी अव्यवस्था हो गई थी।
बैठक में श्याम भोजवानी, मनोज गुप्ता, पप्पू राघव, ममता टपलू, अतुल गर्ग, मुकेश यादव, पवन समाधिया, फिरोज खान, निर्वेश शर्मा, हेमंत प्रजापति, राहुल चतुर्वेदी, राजपाल यादव, देवेंद्र राठौर, सौरभ गुप्ता, अमीर सिंह फौजदार, तनवीर अली, रमन गोयल, अनूप यादव आदि मौजूद थे।