चलती ट्रेनों में ठेके पर लूटपाट कराई जा रही है। 18 बदमाशों का एक ऐसा गिरोह प्रकाश में आया है, जो आगरा से दिल्ली और मथुरा से कोटा रूट पर वारदातों को अंजाम दे रहा है। बाकायदा रेट फिक्स कर रखे हैं। चेन छीनने पर 10 हजार रुपये दिए जाते हैं।
छिने पर्स में मिलने वाली रकम में से चालीस फीसदी बदमाश का हिस्सा होता है बाकी सरगना का। एक यात्री से लूट का अलग पैसा तय है जबकि दो से लूट करने का अलग। खास बात यह है कि इस गिरोह के बदमाश प्लेटफार्म पर मालदार पैसेंजरों की तलाश में लग जाते हैं। वहीं से टारगेट तय हो जाता है।
ट्रेनों में लूट, चोरी और छिनैती की वारदातों ने दहशत फैला रखी है। आगरा से दिल्ली तक एक माह के भीतर 854 वारदातें हुईं हैं। यह आंकड़ा केवल जुलाई माह का ही है। अकेले मथुरा में ही 289 घटनाएं दर्ज की गईं हैं। जबकि तमाम मामले तो पुलिस रिकार्ड में आए ही नहीं हैं।
चलती ट्रेन में लूटपाट के दौरान हुई थी मां-बेटी की मौत
तीन जुलाई को निजामुद्दीन तिरुवनंतपुरम सेंट्रल सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में लूट के दौरान हुई मां-बेटी की मौत की घटना के खुलासे में लगी रेलवे पुलिस को पांच बदमाशों की गिरफ्तारी से एक ऐसा नेटवर्क हाथ लगा है, जिससे अफसर खुद हैरान हैं। यह गिरोह बदमाशों को बाकायदा फीस देकर ट्रेन लुटवाता है।
इतना ही नहीं अगर घटना के दौरान गिरफ्तारी हो जाती है तो जमानत का भी ठेका लिया जाता है। परिवार वालों को भी पैसा भेजा जाता है। इस गिरोह में कुछ महिलाएं भी हैं। यह लोग निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाते हैं। वहां से ऐसे पैसेंजर की तलाश में लग जाते हैं जिनके पास मोटा माल मिल सके।
प्लेटफार्म पर ही शिकार तय कर लिया जाता है। यहीं से बदमाश उस कोच में पहुंच जाते हैं जहां से पैसेंजर चढ़ते हैं। इस गिरोह का सरगना प्रदीप और सतीश गुर्जर हैं। इन लोगों ने फुर्तीले लड़कों को भी गिरोह में शामिल कर रखा है। एसपी रेलवे जोगिंद्र सिंह ने बताया कि पूरा नेटवर्क इस गिरोह का तलाशा जा रहा है।
चलती ट्रेन से कूदने में माहिर, लगा देते छलांग
इस गिरोह के बदमाश चलती ट्रेनों में सवार होने और छलांग लगाने में माहिर हैं। पचास से साठ की रफ्तार वाली ट्रेन से भी कूद जाते हैं। गिरफ्तार बदमाशों ने बताया कि शुरुआत में एक दो बार चोट लगी लेकिन अब कुछ पता नहीं चलता। उनके कभी चोट नहीं लगी। आमतौर पर आउटर के आसपास ही वह लोग ट्रेन से कूदते हैं।