जयपुर हाउस की एक कोठी में झारखंड की किशोरी से बंधुआ मजदूरी कराने के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने लापरवाही की। 29 दिन बाद ही केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। आरोपी कोठी संचालक को क्लीन चिट दे दी। प्लेसमेंट एजेंसी और महिला के बारे में भी पड़ताल तक नहीं की गई।
बता दें, झारखंड की संजना (परिवर्तित नाम) को वर्ष 2007 में एक महिला बहाने से दिल्ली ले आई थी। उक्त महिला ने उसे दिल्ली की दुर्गा प्लेसमेंट एजेंसी को बेच दिया था। आरोप था कि जयपुर हाउस के एक व्यापारी ने 25 हजार में उसे खरीदा था। तब संजना की उम्र तकरीबन आठ साल थी। उससे जबरन मजदूरी कराई गई। पिछले दिनों संजना का भाई और एक सामाजिक कार्यकर्ता आगरा आए। बाल कल्याण समिति से उसे मुक्त कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। संजना को पुलिस की मदद से मुक्त कराया। वहीं समिति की ओर से व्यापारी, प्लेसमेंट एजेंसी के राम प्रसाद और करमी देवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने दो जून को केस में एफआर लगा दी। थाना लोहामंडी पुलिस का कहना है कि संजना ने कोर्ट में बयान दिया था कि उसे कोठी में रहने में कोई दिक्कत नहीं है। वह अपनी मर्जी से रह रही है। इसी आधार पर रिपोर्ट लगाई गई।
मेडिकल रिपोर्ट में उम्र 19 साल बताई
परिवारीजनों ने संजना की शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर उम्र 17 साल बताई थी, जबकि मेडिकल रिपोर्ट में उसकी उम्र 19 साल बताई गई। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे बालिग माना। इस कारण उसे अपनी मर्जी पर छोड़ दिया गया।
आश्रय गृह से आई थी पुलिस
31 मई को थाना लोहामंडी पुलिस संजना को मेडिकल कराने की बात कहते हुए अपने साथ ले गई। इसके बाद उसे गृह नहीं लाया गया। उसे कोठी में फिर से भेज दिया गया था, जबकि बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाना चाहिए था।
पुलिस ने नहीं की ठीक से पड़ताल
सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस का कहना है कि दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसी के बारे में पुलिस को पड़ताल करनी चाहिए थी। झारखंड से बड़ी संख्या में लड़कियों को बंधुआ मजदूरी के लिए लाया जा रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए।
यह सवाल
. दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसी के बारे में पड़ताल नहीं?
. झारखंड से लड़कियों को कौन लेकर आ रहा है?
. आरोपी कोठी संचालक को ही क्यों सौंपी संजना?
. कोठी संचालक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की?