मघटई गांव में मंगलवार रात तीन वारंटियों को पकड़ने के लिए गई पुलिस ने पहले तो अपनी लापरवाही से मुल्जिमों के हिमायतियों को पथराव, फायरिंग और जीप फूंकने का मौका दे दिया। इसके बाद इतनी बौखलाई कि आपा ही खो बैठी। हमलावरों को कड़ा सबक सिखाने के लिए गांव पर कहर बरपा दिया। जो मिला उसे बुरी तरह पीटा, घरों में दरवाजे तोड़े, फर्नीचर तहस-नहस किया। महिलाओं से बदसलूकी तक का आरोप है। कुछ ही घंटों में खाकी का इतना खौफ हो गया कि सूरज निकलने से पहले आधा गांव खाली हो गया।
गांव मघटई में जगदीशपुरा थाने की पुलिस टीम मंगलवार की रात को वारंटी कोमल सिंह, योगेश, चंदन सिंह और मिथलेश की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने गई थी। कोमल सिंह के घरवालों ने पुलिस टीम को पथराव और फायरिंग कर खदेड़ा था। इसके बाद पुलिस जीप में आग लगा दी थी।
बाद में एसएसपी राजेश डी मोड़क शहरभर की फोर्स और पीएसी के साथ गांव पहुंचे। पुलिस ने दबिश के नाम पर गांव में कहर बरपाना शुरू किया। किसान विजेंद्र और उनके तीन बेटे हाकिम सिंह, वासुदेव और गुड्डू अपने परिवारों के साथ घरों में सोए हुए थे। पुलिस ने दरवाजे तोड़ डाले। इसके बाद घर में खड़ी कार के शीशे तोड़े। फ्रिज, टीवी, पंखे और फर्नीचर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। हाकिम सिंह की पत्नी मीना ने सुबकते हुए बताया कि जब घर की महिलाओं ने विरोध किया तो पुलिसवालों ने घसीट-घसीट कर पीटा। बच्चे चीखपुकार मचाते रहे, मगर पुलिसवालों को रहम नहीं आया।
इसके बाद पुलिस और पीएसी के जवानों ने पड़ोस में रहने वाले राजेंद्र सिंह के घर में धावा बोला। यहां राजेंद्र सिंह के तीन बेटे मान सिंह, भोला और प्रदीप रहते हैं। प्रदीप रात 11 बजे गुप्ता ओवरसीज जूता फैक्ट्री से लौटा था। पुलिस ने उसे पकड़ लिया। महिलाओं ने विरोध किया तो उनके साथ बदसलूकी की।
राजेंद्र सिंह कोल्ड स्टोरेज पर ड्यूटी करने गए थे। घर में प्रदीप और महिलाएं ही थीं। पुलिस ने यहां भी फर्नीचर में जमकर तोड़फोड़ की। चूल्हे और पानी की टंकी भी तोड़ दीं। इसी तरह पुलिस ने गांव कृष्णवीर सिंह के नए मकान में उत्पात मचाया। यहां पुलिस के गालीगलौज करने पर घरवाले घर छोड़कर भाग निकले। पूरे घर में जमकर तोड़फोड़ की। फर्नीचर के साथ ही खिड़की और दरवाजे भी तोड़ डाले। कृष्णवीर के भतीजे ने बताया कि पुलिसवालों को जो भी दिखाई दिया, उसे पीट रहे थे। वे कोई छानबीन नहीं कर रहे थे कि कौन घटना में शामिल था और कौन नहीं। समुंद्र सिंह, शिवराज के घरों में तोड़फोड़ की। इसी तरह पुलिस ने वीरेंद्र अग्रवाल के घर के बाहर खड़ी उनकी सफारी गाड़ी का शीशे तोड़ दिए। गांव के दूसरे छोर पर रहने वाले प्रजापति समाज के घरों में भी पुलिस ने तोड़फोड़ की। योगेश और कैलाशी की बहन निर्मला ने बताया कि उन लोगों का घटना से कोई वास्ता नहीं था। लेकिन आधी रात के बाद पुलिस ने घरों में तोड़फोड़ और लूटपाट शुरू कर दी। इसके बाद पुरुष गांव छोड़कर भाग निकले।
हमारा चंदन से झगड़ा है, फिर हम पर कहर क्यों?
पुलिस पर वासुदेव और गुड्डू के घरों में भी मोटरसाइकिलें, वाशिंग मशीन और फर्नीचर तोड़ने का आरोप है। वासुदेव की पत्नी देवकी का कहना था कि जिस वारंटी चंदन सिंह को पुलिस पकड़ने आई थी, उसके परिवार से उनका कई साल से झगड़ा चल रहा है, बोलचाल तक बंद है। वे भला उसके लिए पुलिस पर हमला कैसे कर सकते हैं?