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कोचिंग सेंटर तो दिखावा था, असली काम पिस्टल बनाना था

Tue, 07 Mar 2017 12:09 AM IST
कोचिंग सेंटर तो दिखावा था, असली काम पिस्टल बनाना था
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कोचिंग सेंटर तो दिखावा था, असली काम पिस्टल बनाना था - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एमएससी पास, वह भी मैथमेटिक्स में। डिवीजन भी फर्स्ट। पढ़ने में ही नहीं, पढ़ाने में भी होथियार। बीएससी के छात्र-छात्राएं पढ़ने आते थे लोकेश के कोचिंग सेंटर में लेकिन उसका मकसद पढ़ाकर नहीं, पिस्टल बनाकर पैसा कमाना था। उसने कोचिंग सेंटर तो सिर्फ दिखावे के लिए खोल रखा था। यहां दो-तीन घंटे देता था जबकि फैक्ट्री में छह-सात घंटे।
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पुलिस ने सबसे ज्यादा सवाल लोकेश से ही किए। अफसर भी हैरान थे कि इतना पढ़ा लिखा शख्स ऐसे काम में कैसे लग गया। उसने बताया कि पिता मदन लाल शर्मा रिटायर्ड प्राइमरी टीचर हैं। पुलिस के लिए दूसरी चौंकने वाली बात यही थी कि लोकेश को हथियार बनाने की ट्रेनिंग पिता से मिली।
बात 1995 से 1997 तक की है। मदन लाल शर्मा को असलाह रखने का शौक था। वह चलाना ही नहीं सीखे बल्कि  रिवाल्वर, पिस्टल, बंदूक, राइफल के पुर्जे पुर्जे से वाकिफ हो गए। सेवानिवृत्त के बाद आर्म्स डीलर के यहां हथियार रिपेयर का काम पकड़ लिया।
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इसी दौरान उनकी पहचान कई आर्म्स डीलर से हुई। उस समय उनका हाथ लोकेश बंटाता था। तब वह इंटर में था। तभी उसने प्लान बना लिया कि एक दिन हथियार बनाने की फैक्ट्री खोलेगा। इसके बाद मदन पूजा पाठ और ज्योतिष में लग गए। लोकेश ने दिमाग लगाया पढ़ाई में। उसने 2004 में आरबीएस कॉलेज से एमएससी किया। अंक आए 62 प्रतिशत।
नौकरी नहीं मिली तो कोचिंग सेंटर खोल लिया। पैसा तो मिल रहा था लेकिन ज्यादा नहीं। वह करोड़ों कमाना चाहता था। इसलिए 2008 से हथियारों के बारे में किताबें पढ़ना शुरू किया। चार साल में पूरा गिरोह तैयार कर लिया। 2012 में हथियार बनाकर बेचने शुरू कर दिए।
पिता से भी होगी पूछताछ
आगरा। लोकेश के पिता मदन लाल शर्मा अब ज्योतिष का काम करते हैं। पुलिस उनसे भी पूछताछ करेगी। पुलिस को शक है कि हथियारों की सप्लाई के लिए आर्म्स डीलर के बारे में जानकारी उन्होंने ही बेटे को दी।

मेरी पहचान पुरानी है
आर्म्स डीलर हरजीत सिंह सरना ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि लोकेश और उसके पिता से उसकी पुरानी पहचान है। दोनों उनके यहां भी हथियार मरम्मत का काम कर चुके हैं।

हमें तो पता ही नहीं चला
हथियार फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद दोनों जगह के पड़ोस में रहने वाले लोगों का कहना था कि उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। वे तो समझ रहे थे कि यहां खराद का काम होता है। पुलिस के आने पर पता चला।

पुलिस टीम को मिलेगा पुरस्कार 
इस खुलासे में शामिल टीम को एसएसपी ने पांच हजार का इनाम देने की घोषणा की है। टीम में ट्रैफिक पुलिस के इंस्पेक्टर तेज बहादुर सिंह, पांच कांस्टेबल, थाना एत्माद्दौला के इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार, दरोगा रंजीत सिंह और तीन कांस्टेबल शामिल हैं।
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