नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी ( एनआईए ) की टीम ने बुधवार को आगरा के एत्माद्दौला में बांग्लादेशी मूल की 15 महिलाओं से लंबी पूछताछ की। यहां से तीन महीने पहले जाली करेंसी की तस्कर फातिमा उर्फ लीची पकड़ी गई थी। वह भी बांग्लादेश की है। एनआईए को उसी से जानकारी मिली कि एत्माद्दौला और फिरोजाबाद की लगभग 80 महिलाएं जाली करेंसी चलाने का काम करती हैं।
इनमें से ज्यादातर सब्जी बेचती हैं। एजेंसी अब इनके खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लगी है। जल्द ही इनमें से कई की गिरफ्तारी हो सकती है। इनके बैंक खातों की पड़ताल भी की गई है। ये सभी महिलाएं बांग्लादेश के मालदा और आस पास की रहने वाली हैं। पिछले 25 सालों में बार्डर क्रास करके आई हैं। इन्होंने आगरा और फिरोजाबाद में शादी की है।
इनके राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड बन चुके हैं। फातिमा का तो पासपोर्ट भी बन गया था। फातिमा को बांग्लादेश का जाली करेंसी सप्लायर अपल शेख नकली नोट लाकर देता था। वह आगे चलाती थी। दिखाने के लिए वह सब्जी बेचने का काम करती थी। उसने बांग्लादेशी मूल की महिलाओं से भी यही काम कराया।
अपल शेख की कोलकाता में गिरफ्तारी के बाद एनआईए को फातिमा के बारे में पता चला। उसे पकड़ा गया तो उसने 80 और महिलाओं के नाम बता दिए। अब इनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एनआईए की टीम बुधवार सुबह पहुंची थी। इसमें कोलकाता और दिल्ली के अधिकारी हैं। इस बारे में सीओ छत्ता बीएस त्यागी का कहना है कि एनआईए की जांच गोपनीय रहती है। एजेंसी के अधिकारी पुलिस से सुरक्षा के लिए कहते हैं, यह मुहैया कराई जाती है। इस बार भी यही हुआ है।
एनआईए ने इस ऑपरेशन में एंटी टेरेरिस्ट स्कवैड (एटीएस) को भी जानकारी दे रखी है। लीची के खिलाफ जानकारी एटीएस ने ही जुटाई थी। अब बांग्लादेशी मूल की महिलाओं के बारे में पड़ताल करके एनआईए को जानकारी दे रही है।